बुलबुले जैसे सपने थे मेरे …
सुन्दर , साफ , शुद्ध …
इतना स्पष्ट की मैं अपने सपनो को पूरा होते देख सकती थी ….
एक दिन मुझे ज़ोर से किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ सुनाई दी..
घबरते हुए बाहर गई तो देखा की बुलबुला टूट गया …
निराश सी होके चुप खड़ी रही …..
बहुत देर बाद समझ आया की जिसके सपने टूट जाते है , उसके लिए बहुत बड़ी खुशियाँ … एक नयी उम्मीद इंतेजार कर रही होती है ..
बस टूटे सपनो से बाहर निकलने की देरी है | @surbhisays