बहुत खुशी और उत्साह से चढ़ तो लिया पहाड़ …

बहुत जल्दी थी …. पीछे मुड़ के देखना ही भूल गए की बाकी मेरे अपने भी साथ में है….

उपर पहुचते ही बहुत गर्व हुआ अपने पे..

पर पता नहीं क्यू मन शान्त नहीं था…

सोचा किसी से बात करलू मन शान्त हो जायेगा… लेकिन आस पास देखा तो कोई नहीं था…

कोशिश बहुत की सबको बुलाने की लेकिन कोई नहीं आया …

लेकिन ध्यान से देखा तो मेरे अपनो ने मुझे आवाज़ दी… “घबराओ नहीं हम आ रहे है … ”

ये सुनते ही अफसोंस हुआ और समझ आया की ऊपर पहुचने की इतनी जल्दी थी मुझे की मैं अपनो को ही भूल गयी ….

ये सब होने के बाद भी वह मेरे लिए खड़े है..!! @surbhisays

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