दूर ना जा सकी बिछड़ने का डर था…
पास ना आ सकी जुड़ने का डर था…
सोचा बीच में ही रह जाऊ
क्यूकि
टूटने से अच्छा था की
आधा – आधा कर के सह ले भवनाये | @surbhisays
दूर ना जा सकी बिछड़ने का डर था…
पास ना आ सकी जुड़ने का डर था…
सोचा बीच में ही रह जाऊ
क्यूकि
टूटने से अच्छा था की
आधा – आधा कर के सह ले भवनाये | @surbhisays