आज सोचा कोई किताब पढू…
उठा ली ज़िन्दगी की किताब.. और पन्ने पलटना शुरू कर दिया ..
शुरूवात के पन्ने कितने खुशी भरे थे….
लेकिन जैसे -जैसे पन्ने आगे बढ़ते जा रहे थे , वैसे -वैसे पन्ने भीगे हुए मिल रहे थे …..
मैने सोचा यह कैसी किताब है .. जिसमे आधे पन्ने सूखे और आधे नम है ? …
मैने सूखे और नम पन्नो को आपस में मिला दिया…
ताकि अब कोई भी यह किताब पढ़े तो समझ जाये की ज़िन्दगी जीना इतना भी मुश्किल नहीं …
कभी धूप है तो कभी छाव @surbhisays