कुछ दिन आंसुओ के होते है
सुबह के आये रात तक खिले रहते है
कसूर पुछो तो हम पे ही “कमज़ोर ज़स्बात ” होने का
इल्जाम लगा देते है । @surbhisays
कुछ दिन आंसुओ के होते है
सुबह के आये रात तक खिले रहते है
कसूर पुछो तो हम पे ही “कमज़ोर ज़स्बात ” होने का
इल्जाम लगा देते है । @surbhisays