शिकार हो चला मन लगाव का,
ज़ुबान चुप है , आँखें सूखी
शायद दिल में चकनाचूर हो रहें है जज्बात ,
सन्नाटा होता ही अकेलापन गूँज उठेगा।
शिकार हो चला मन लगाव का,
ज़ुबान चुप है , आँखें सूखी
शायद दिल में चकनाचूर हो रहें है जज्बात ,
सन्नाटा होता ही अकेलापन गूँज उठेगा।