क्यूँ सुकून छीनती हो जिंदगी ,

क्यूँ लगाव में फसाती हो जिंदगी ,

कैद हूँ तेरी हथकड़ी में ,

साँसें भीख मांगती है अपनी आज़ादी के लिए

लेकिन तुम्हें परीक्षा लेने की आदत है ,

शिक्षक बनने का तुम्हें शौक है और परीक्षा लेना तुम्हारी फितरत..

खेल लो अपना यह शिक्षक विद्यार्थी का खेल ,

लेकिन ये ना भूलना की एक विद्यार्थी शिक्षक को हरा आगे निकल सकता है । @surbhisays

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