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खोखला कर रहा ये अकेलापन, घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन ! सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ? मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ? अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था , आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था , साथ की… Read more
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चंदनिया तेरी आँख मिचौली , छुप क्यूँ रहा है वैसे ? बोला “मेरे माथे की मौलि , झुक कर देखा जाए कैसे? “ डर का पहरा तेरे चेहरे , “गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !” गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक , अल्हड़ मन , होता हिंसक ! “वो देख दाग ,हँसी का… Read more
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I can never fit in a definition of “perfect girl , “ wanted to be but my “kismet” a twirl ! Why our life dependent on fate ? Stranded in its arm , no abate .. Everyone found their “perfect” perfectly bind. Am I invisible ? left behind ! Striving everyday …. hoping To accept… Read more
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And this time again I am inches away , Tears , loneliness of which my heart weighs , Never knew growing up will be spine chilling , Where hatred , destestation hatches everyday killing ! What’s my mistake , my heart aches , Non – acceptance , mind quakes ! Why always me ? Am… Read more
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हर कोशिशें नाकाम है , पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है ! धैर्य की सीमा टूट रही हैं, भावनाओं की डोर छूट रही है , रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं , सादगी परखना किसी को आता नहीं ! कसूर सिर्फ इतना है कि , अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है , लेकिन दूसरों… Read more
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नहीं है वजूद मेरा किसी के सामने , करीब हो के भी कोई ना आता यह हाथ थामने , देखो मुझे , मैं भी हूँ यही मौजूद , दिखती क्यूँ नहीं मैं , दस्तक के बावजूद ? खास है ना सब , मेरे अलावा .. अकेला ही रह गया मेरा बुलावा ! रोता है दिल… Read more
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होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है , साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है , रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है , चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ” गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है , ये हारा… Read more
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अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं , तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं ! रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी… Read more
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जाने के बाद , मुड़ के देखा ना कर , क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए । यूँ अपनी नजरों में इज्ज़त बनाना , थकान देती ,लेकिन जाने क्यूँ हर दिन पसीने की बूंद , मुस्कान देती । ना देख मुड़ कर , क्या पता ये… Read more
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टूटा था वो काँच आदतों का , तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना, जिधर चुभा ना था , चाहतों का बोना , आँसुओं से लत पत , दौड़ता दर्द , घबराहट , उलझन , दुखों का ज़र्द । टूटा था वो काँच आदतों का तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना , जो समझा… Read more
