संघर्षो में गोते खाती जिंदगी,
संतुलन बना रही है ,
जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत ,
हर डर काट रही है ,
यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें
विश्वास दिला रही है , कि
तपिश ही है जो
साँस चला रही है । @surbhisays
संघर्षो में गोते खाती जिंदगी,
संतुलन बना रही है ,
जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत ,
हर डर काट रही है ,
यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें
विश्वास दिला रही है , कि
तपिश ही है जो
साँस चला रही है । @surbhisays
क्यूँकी वो कहते है ना कि
कुर्बानी ऐसी करो की
पीछे मुड़ने में दर्द ना हो ,
यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर
धड़कने सर्द ना हो ,
दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ ,
आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की
नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार
सुकून के पल ही पल हो। @surbhisays
मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से ,
लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है !
एक अजीब सी उदासी ,
चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है !
लोगों से दूर , सुनसान ,
फिर भी दिल में घमासान ,
ना जाने क्यूँ है !
बचपन का अकेलापन आज
अभी तक इसका साथ पता नहीं क्यूँ है !
डरी , घबराई ,सहमी
आज भी नज़रअंदाजी , ना जाने क्यूँ है !
टूटा बिखरा पड़ा आत्मविश्वास , पता नहीं क्यूँ है!
चुप , शांत , ये खामोशी ना जाने क्यूँ है ,
अगर है भी तो ,
इसे चिल्ला- चिल्ला के मदद ना मांग पाना
पता नहीं क्यूँ है। @surbhisays
बारिश की बौछार से
भीगा हुआ मेरा दिल ,
धूप की गुनगुनाहट से ,
सेंकता हुआ मेरा दिल ,
तेज़ हवाओं की थपेड़ों से
चीरता हुआ मेरा दिल ,
झुंझलाहट की मार से
थका हुआ मेरा दिल ,
तेरे साथ होने के एहसास से ,
सब सह लेना चाहता मेरा दिल ,
तेरी मोहब्बत से बुने घरौंदा से ,
ठहराव समेटेना चाहता मेरा दिल ।
@surbhisays

To a heart racing ,
are you still into trading ?
Trading of those bloomy sentiments into attachments ?
And profiting it into detachments ?
– From a broke soul @surbhisays
And the plateaus of sigh ,
are growing high ,
With the meadows of happiness ,
thriving lifeless !
The dooming present ,
and persistant accentuating repent ,
strangulating the emotions !
The feels on edge ,
with no one to even pledge ,
Here’s the broke soul ,
summoning GOD to patch this hole ! @surbhisays
एक तरफ तू है ,
एक तरफ मै हूँ ,
एक ही दीवार के नीचे ,
सामने पड़ा गुलदस्ता
बेज़ारी का ,
सँवार रहा गुलदान ,
दिया है तूने हर बार ।
सींच रहे जबरन ,
अखिर दिया तो तूने ही है
तुम्हारी आदत
और मैं सिर्फ कहावत
खिले तन्हाई के गुल
जिधर भंवरे की गुनगुनाहट
देख तेरी मुस्कराहट ,
और मेरे दिल की घबराहट ,
कि क्यूँ ?
एक तरफ़ा रिश्ता प्रश्न चिन्ह लगा जाता ,
कि बिना आग उम्मीद इसे सुलगा जाता । @surbhisays
फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी !
कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी
देख ,
वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया !
पस्त पड़ा आत्मविश्वास ,
धड़कने बदहवास ,
यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श ,
धुंधला संदर्श
मेरी औकात बता गया !
सुन लो ऐ हमराह ,
अकेला होना अधूरा नहीं ,
परछाई का साथ ,बुरा नहीं
ये जीवन की सूनी पगडंडी
अनजान है ,
कि हर मोड़ की खंडी
को छांट
डर बेजान है। @surbhisays
हर साल हर नर्म दास्तान ,
लिपटा है यादों में हर वो इंसान ,
जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ ।
उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,
की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता ।
देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,
सियाही में डूबा हुआ ,
लिख रहे है दिल का छुआ…
इस उम्मीद में कि
पंख में फँसे बोझ कम हो जाएंगे
हिम्मत के धागे इसे वापस सिल पाएंगे। @surbhisays
वादे थे सबके साथ ना छोड़ने के ,
देखो आज आँसू ही हाल पूछते है ,
गूंजती धड़कने , सिसकती साँसें ,
देखो आज आँसू ही हाल पूछते है ,
जिसे चाहो , वही दूर हो जाता , और ऐसे मेरा आत्मविश्वास भी मुझसे कह जाता कि ,
“देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , “
सवाल है दिल में
कि क्या खुशियाँ भी रहती नसीब के बिल में !
नम रहता सिरहाना मेरा ,
अंधेरे की बात है ,अंधेरे तक रहने देना ,
टूट चुके है हर ज़ज्बात मेरे ,
लेकिन हर बार
इन कांपते हाथों को थाम लेते
बुढ़ी माँ के प्यार के बसेरे । @surbhisays