बारिश भी बेमिसाल है ,
लेकिन कुछ तो इसके मन में मलाल है ,
कि लाखों करोड़ों आँसुओं के नक़ाब बनने का क्यूँ है मुझ पर इल्ज़ाम ,
शीतलता देना मेरा काम , फिर क्यूँ हूँ मैं बदनाम सुबह ओ शाम ?
विभिन्न प्रशन्न उनके मन को निचोड़ेते है ,
अपने ज़ज्बात मेरे से जोड़ते है !
जज़्बातों का सैलाब ,
जुबान बेताब!
इकरार करने से डर है ,
छूट जाने का कहर है!
चलो मेरे जरिए दुख कम हो जाता है ,
दिल का ज़ख्म अल्प हो जाता है !
कसम खाता हूँ ,
गुरूर नहीं करूंगा अपनी वफ़ादारी का ,
बेपर्दा ना करूंगा आपकी खुद्दारी का । @surbhisays
