इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,
की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,
चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,
बदलते ही सबने इसको नकारा है ,
दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,
सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays