रुख़सत कर दिया लगाव की रियासत को ,
दहशत का उफान , अलगाव कर दिया इसकी सियासत को !
सुकून की खुशबू धुंध सी ,
जैसे मौसम बदल , चल देती हवा सर्द सी !
आज़ादी की कोशिश , पहचान बनाने की ,
लग गई भावना , मचान बनाने में , “लगाव मुक्ति ” की !
डर था कि
लांग ना जाए दिल ये , मचान ऊँची नहीं ,
जकड़ ना ले दिल को , लगाव की लहर , सूची नहीं !
बारिश तेज और बाढ़ की संभावना ,
टूटती दीवार , लगाव को प्रस्तावना !
कि बहाना है दिल को , तो बहा लो ,
लेकिन बहते – बहते इसे तैरना सीखा दो । @surbhisays