emotions
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छुपा है दर्द आँखों में , लटकी हुई है भावनायें हर शाखों पे । घुटन का एहसास हर दिन मारता है , क्या करे ! हर बार हर दिल अपनाने से नकारता है ! ठोकर खा फिर भी ये आँखें मुस्कराती है , लेकिन आँसुओं का बोझ , चक्रवाती है ! झाँक रही है भावनाएं… Read more
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रुख़सत कर दिया लगाव की रियासत को , दहशत का उफान , अलगाव कर दिया इसकी सियासत को ! सुकून की खुशबू धुंध सी , जैसे मौसम बदल , चल देती हवा सर्द सी ! आज़ादी की कोशिश , पहचान बनाने की , लग गई भावना , मचान बनाने में , “लगाव मुक्ति ” की… Read more
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क्या फायदा उम्मीद रखने से , जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से ! आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से , तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से ! हर कोशिशें छोटी – छोटी , उम्मीदें मोटी – मोटी , कि शायद रिझा सके , सारी शर्तें सुलझा… Read more
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शौक रखते थे हम आँखों की सुंदरता देखना का , पलके झपकते ही इन्तेज़ार करते थे , चार होने की स्थिरता का ! आँखें कुछ तो कह रही थी , अंदर ही अंदर सह रही थी ! बेसब्री से इन्तेज़ार हो रहा था , “अनदेखी” औज़ार वार कर रहा था ! बिलख-बिलख कर रो रही… Read more
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दिल के घर में जगह बनाना कितना मुश्किल है , थोड़ा ठोस , थोड़ा स्थिर , लेकिन इरादा मुस्तक़िल है ! सामने हो के भी हिम्मत नहीं पड़ती बोलने की , शायद दिल समय लेता होगा इरादे , तोलने की ! थोड़ा कदम बढ़ाना होगा , रास्ता सुरंग है , खज़ाना ज़रूर होगा , पिघलना… Read more
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निरंतर प्रयास मे रहती भावनायें , बोलने के , लेकिन निगल के रह जाती घूँट डर के , डर इस बात का कि कहीं वो बुरा ना मान जाए , बुरा मान कहीं ख्वाब अधूरे ना कर जाए , ख्वाब अधूरे कर कहीं डर की जीत पूरी ना कर जाए ! समेट कर भावनायें दिल… Read more
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अपने से नफ़रत का एहसास होना , हर पल घुटन की सास लेना , लोगों द्वारा शारीरिक सुंदरता के कदम छुना , और इस तरह आत्मविश्वास के पलकों का चूना , जीवन और मौत के रस्ते पर झूलने के बराबर है ! काश लोग एक बार दिल मे झाँक के देखते , की कैसे बसे… Read more
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सोचा था हम खास बहुत होंगे , हमारी सादगी , वास्तविक रूप देख वो उल्लासित होंगे , सातवें आसमान पर तैर रही थी , लेकिन पता ना था कि धीरे-धीरे गैर हो रही थी ! हम सपने सुहाने भविष्य के सपने देख रहे थे , हर एक भावनायें , ज़ज्बात सेक रहे थे ! सोचा… Read more
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बहुत दर्द देता है ये अकेलापन , आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन ! चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द , गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द ! डरता है दिल साँझा करने से , क्या करे इतने धोखे बाद ,… Read more
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हर कोई किसी के करीब है , लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है ! ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है , या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है ! आँखें नम और जुबान मौन है , क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है ! शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का… Read more
