दिल के घर में जगह बनाना कितना मुश्किल है ,

थोड़ा ठोस , थोड़ा स्थिर , लेकिन इरादा मुस्तक़िल है !

सामने हो के भी हिम्मत नहीं पड़ती बोलने की ,

शायद दिल समय लेता होगा इरादे , तोलने की !

थोड़ा कदम बढ़ाना होगा ,

रास्ता सुरंग है , खज़ाना ज़रूर होगा ,

पिघलना पड़ेगा इस उलझन भरी राह में ,

शायद यही प्यार का तीराह है !

परेशान ना हो ,

कठिनाई होना ज़रूरी है ,

प्यार पाना फितूरी है !

जीलो आज इस कष्ट में ,

कल होगा नाम तुम्हारा , प्यार के पृष्ठ में !

भविष्य सबका सुहाना है ,

बस अभी कुछ कष्ट को चुकाना है । @surbhisays

निरंतर प्रयास मे रहती भावनायें , बोलने के ,

लेकिन निगल के रह जाती घूँट डर के ,

डर इस बात का कि

कहीं वो बुरा ना मान जाए ,

बुरा मान कहीं ख्वाब अधूरे ना कर जाए ,

ख्वाब अधूरे कर कहीं डर की जीत पूरी ना कर जाए !

समेट कर भावनायें दिल में दफन करना ही एक राह है ,

निकल गई तो , कफ़न में ढ़की , काँधे में लदी , उसकी कराह है !

कितनी जिद्दी है ये भावनायें!

मुझे कहती , ” चल एक प्रयास करते है , हिम्मत करो मिल के अभ्यास करते है ! “

“मान लो वह ये सुन , हमारा प्रस्ताव कबूल करले , कबूल कर हमसे प्यार से बर्ताव करले ! “

मुझसे हँसी रोकी ना गई , मेरा साथ दे , भावनायें मज़बूत होती गई !

मैंने कहा , ” दल- दल हो तुम भावना ! फाँस लेने की है तुम्हारी योजना ! “

यह सुन मुझसे कहती , ” सच्चा है प्यार तुम्हारा तो थोड़ा उनको भी दो व्यक्त करने का मौका , क्यूँकी साथ जल्दी काट देती कष्ट का रास्ता , यह प्यार की नौका ! ” @surbhisays

सोचा था हम खास बहुत होंगे ,

हमारी सादगी , वास्तविक रूप देख वो उल्लासित होंगे ,

सातवें आसमान पर तैर रही थी ,

लेकिन पता ना था कि धीरे-धीरे गैर हो रही थी !

हम सपने सुहाने भविष्य के सपने देख रहे थे ,

हर एक भावनायें , ज़ज्बात सेक रहे थे !

सोचा था एक दिन बात करते है ,

लेकिन ये सुन

वो हँसे ,

थोड़ा बरसे ,

अपने ज़ज्बात कसे ,

और इस तरह मेरे दिल से दग़ा, फरेबी की जड़े !

टूटा दिल मेरा , अकेलापन समेट रहा था ,

जकड़ कर उसे लपेट रहा था !

अब किसी पर विश्वास करने का मन नहीं करता ,

अंधविश्वास है ये प्यार अब जुड़ने का मन नहीं करता !

काश ये दर्द जल्दी कम हो जाए ,

प्यार से अब मेरे दिल की नजरबंदी हो जाए । @surbhisays

बहुत दर्द देता है ये अकेलापन ,

आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन !

चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द ,

गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द !

डरता है दिल साँझा करने से ,

क्या करे इतने धोखे बाद , डर गया है मरने से !

इन्तेज़ार मेरा खाली चला गया ,

प्यार से उगाया फूल , तार- तार कर गया !

बोला रख लेना इसकी पंखुड़ियां , सूखी , बेजान – तू इसी लायक है ,

मैंने पूछा सूखी पंखुड़ियां भी खुशबू देती, क्या कोई उम्मीद या दायक है?

हँसता रहा मेरी उम्मीद देख के ,

कहता तू पागल, बचकानी , तरस आता तेरा इन्तेज़ार देख के !

टूटा मेरा दिल बस मुझसे यही पूछता ,

“क्या कोई है जो तेरा हाथ पकड़ के बोले , ले मसल देता हूँ तेरे दिल के हिचकोले !” @surbhisays

हर कोई किसी के करीब है ,

लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है !

ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है ,

या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है !

आँखें नम और जुबान मौन है ,

क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है !

शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का ,

मारेगा , जलाएगा , लौह है वो उस चिंगारी का !

डरों नहीं प्यार है कोई औजार नहीं ,

थोड़ा जिद्दी है , बेज़ार नहीं !

अनोखा है , थोड़ा रुलाएगा ज़रूर ,

लेकिन ये प्यार है जनाब , मनाएगा ज़रूर । @surbhisays

बारिश भी बेमिसाल है ,

लेकिन कुछ तो इसके मन में मलाल है ,

कि लाखों करोड़ों आँसुओं के नक़ाब बनने का क्यूँ है मुझ पर इल्ज़ाम ,

शीतलता देना मेरा काम , फिर क्यूँ हूँ मैं बदनाम सुबह ओ शाम ?

विभिन्न प्रशन्न उनके मन को निचोड़ेते है ,

अपने ज़ज्बात मेरे से जोड़ते है !

जज़्बातों का सैलाब ,

जुबान बेताब!

इकरार करने से डर है ,

छूट जाने का कहर है!

चलो मेरे जरिए दुख कम हो जाता है ,

दिल का ज़ख्म अल्प हो जाता है !

कसम खाता हूँ ,

गुरूर नहीं करूंगा अपनी वफ़ादारी का ,

बेपर्दा ना करूंगा आपकी खुद्दारी का । @surbhisays

किराएदार है ये जिंदगी ,

वसूली की कर रही बंदगी ,

पायी-पायी के हिसाब को कहती दिल्लगी ,

खोखला कर हो जाती इसकी रवानगी !

टूटती कराहती सासें ,

अपनी मौजूदगी की नुमाइश करती ,

सपना देखती , अंतिम यात्रा और अर्थी !

पसीना और डर का घूंट ,

जज़्बातों की हो गई लूट!

भावनाएं दाव पर लगी है ,

ना जाने क्यूँ उम्मीदें इन्तेज़ार पे लगी है !

ये सब होने के बाद , साँसों ने मान लिया ,

कि लोगों को फर्क़ नहीं पड़ता किसी के फ़िक्र का ,

दिलों का मिलना बस एक ज़िक्र था ! @surbhisays

जलता सूरज ,

बादलों संग छुपन छुपाई खेलता ,

मुझे देख पूछता ,

” तेरे आँसू की वजह मै हूँ या कोई और ? ”

नादानी मे पगला बहुत सच्ची बात पूछ गया !

कैसे बताऊँ उसे टूटती उम्मीदों की दास्तान ,

जो कर ना पाया ये दिल उसका भुगतान ,

पता ना था कि उजाला कर देगा हाल -ए -दिल का ऐलान ,

और ऐसे खोल देगा मेरे आँसुओं की पहचान । @surbhisays

  • आज बहुत रोना आया ,

लेकिन आँसू चेहरे तक क्षलक ना पाया ,

धुंधली हो गई है नज़रें ,

लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कुराता ही पाया !

  • घबराता रहा दिल , आँसुओं की बोझ में दबे धड़कता रहा ,

लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कुराता ही पाया !

  • गुमसुम है जुबान , गले तक फँसी है भावना,

लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कराता ही पाया !

  • ऊपर नीचे होती साँसों ने बोलने पर ज़ोर लगाया,

लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कुराता ही पाया !

किसी ने पूछ ही लिया हमसे की कौन है “वो ” जिसने ये हाल बनाया?

हँस के हमने बता ही दिया… “वो” कोई नहीं हमारी “उम्मीदें” ही है जिसने ये हाल बनाया । @surbhisays