Surbhi Says

@surbhisays

expectations

  • क्या फायदा उम्मीद रखने से , जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से ! आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से , तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से ! हर कोशिशें छोटी – छोटी , उम्मीदें मोटी – मोटी , कि शायद रिझा सके , सारी शर्तें सुलझा… Read more

  • दिल के घर में जगह बनाना कितना मुश्किल है , थोड़ा ठोस , थोड़ा स्थिर , लेकिन इरादा मुस्तक़िल है ! सामने हो के भी हिम्मत नहीं पड़ती बोलने की , शायद दिल समय लेता होगा इरादे , तोलने की ! थोड़ा कदम बढ़ाना होगा , रास्ता सुरंग है , खज़ाना ज़रूर होगा , पिघलना… Read more

  • निरंतर प्रयास मे रहती भावनायें , बोलने के , लेकिन निगल के रह जाती घूँट डर के , डर इस बात का कि कहीं वो बुरा ना मान जाए , बुरा मान कहीं ख्वाब अधूरे ना कर जाए , ख्वाब अधूरे कर कहीं डर की जीत पूरी ना कर जाए ! समेट कर भावनायें दिल… Read more

  • सोचा था हम खास बहुत होंगे , हमारी सादगी , वास्तविक रूप देख वो उल्लासित होंगे , सातवें आसमान पर तैर रही थी , लेकिन पता ना था कि धीरे-धीरे गैर हो रही थी ! हम सपने सुहाने भविष्य के सपने देख रहे थे , हर एक भावनायें , ज़ज्बात सेक रहे थे ! सोचा… Read more

  • बहुत दर्द देता है ये अकेलापन , आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन ! चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द , गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द ! डरता है दिल साँझा करने से , क्या करे इतने धोखे बाद ,… Read more

  • हर कोई किसी के करीब है , लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है ! ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है , या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है ! आँखें नम और जुबान मौन है , क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है ! शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का… Read more

  • बारिश भी बेमिसाल है , लेकिन कुछ तो इसके मन में मलाल है , कि लाखों करोड़ों आँसुओं के नक़ाब बनने का क्यूँ है मुझ पर इल्ज़ाम , शीतलता देना मेरा काम , फिर क्यूँ हूँ मैं बदनाम सुबह ओ शाम ? विभिन्न प्रशन्न उनके मन को निचोड़ेते है , अपने ज़ज्बात मेरे से जोड़ते… Read more

  • किराएदार है ये जिंदगी , वसूली की कर रही बंदगी , पायी-पायी के हिसाब को कहती दिल्लगी , खोखला कर हो जाती इसकी रवानगी ! टूटती कराहती सासें , अपनी मौजूदगी की नुमाइश करती , सपना देखती , अंतिम यात्रा और अर्थी ! पसीना और डर का घूंट , जज़्बातों की हो गई लूट! भावनाएं… Read more

  • जलता सूरज , बादलों संग छुपन छुपाई खेलता , मुझे देख पूछता , ” तेरे आँसू की वजह मै हूँ या कोई और ? ” नादानी मे पगला बहुत सच्ची बात पूछ गया ! कैसे बताऊँ उसे टूटती उम्मीदों की दास्तान , जो कर ना पाया ये दिल उसका भुगतान , पता ना था कि… Read more

  • आज बहुत रोना आया , लेकिन आँसू चेहरे तक क्षलक ना पाया , धुंधली हो गई है नज़रें , लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कुराता ही पाया ! घबराता रहा दिल , आँसुओं की बोझ में दबे धड़कता रहा , लेकिन कसम से उसने चेहरे को मुस्कुराता ही पाया ! गुमसुम है जुबान ,… Read more