जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई है और हम लाचार से हो गए है| इस हद तक खोखला सा हो गया है कि एक छोटे से कीड़े के जाने पर आँसू आ जाते है| बस इन्तेज़ार है और विनती है जिंदगी से थोड़ा नर्म हो जाने की 🙏@surbhisays
facts
ईमानदारी का ताज़ पहने ,
बिन गलतियों के धिक्कार सहते ,
मौन हो गई हूँ |
जटिल है यह जीवन,
जहाँ हर इंसान ,
चुभा रहा कठोरता , आजीवन |
फिर भी,
मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है ,
ना कोई सहारा, ना कोई संगी है।
बस तेरी ही आस है, हे ज़िंदगी ।
नयी राह और अकेलापन, यही तेरा उसूल है |@surbhisays
And in the whirlpool of sorrow ,
Dwells the brightest light
Struggling and fighting,
Battling to survive @surbhisays
इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,
की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,
चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,
बदलते ही सबने इसको नकारा है ,
दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,
सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays