feelings
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अब कोई हैरत नहीं होती, जब किस्मत मुख मोड़ती है,ज़िंदगी का बेरहम होना, तो अब रोज़ की बात लगती है। उदास नहीं हूँ मैं , बस अंदर से टूट गई हूँ,ज़िंदगी के इस अजीब खेल से, मैं बुरी तरह रूठ गई हूँ। जी रही हूँ मैं , बस जैसे-तैसे, ‘काश ऐसा होता, काश वैसा होता’,… Read more
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ईमानदारी का ताज़ पहने , बिन गलतियों के धिक्कार सहते , मौन हो गई हूँ | जटिल है यह जीवन, जहाँ हर इंसान , चुभा रहा कठोरता , आजीवन | फिर भी, मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है , ना कोई सहारा, ना कोई संगी है। बस तेरी ही आस है, हे ज़िंदगी ।… Read more
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कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई , वो हँसती खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays Read more
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इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे , की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है , चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है , बदलते ही सबने इसको नकारा है , दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं , सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना ,… Read more
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अनंत है यह आसमाँ,किधर दर्द साँझा करूँ?हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह, बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays Read more
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शोर है , तेज़ सा , दिल घबरा रहा है , दूर है सब , परहेज सा , रोज़ जता रहा है। क्रोध है , पुकार सा , घायल कर रहा है , झाँकता ना तू एक बार , कायल कर , “कटाक्ष” रहा है । दर्द है , उफान सा , कैद कर रहा… Read more
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संघर्षो में गोते खाती जिंदगी, संतुलन बना रही है , जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत , हर डर काट रही है , यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें विश्वास दिला रही है , कि तपिश ही है जो साँस चला रही है । @surbhisays Read more
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क्यूँकी वो कहते है ना कि कुर्बानी ऐसी करो की पीछे मुड़ने में दर्द ना हो , यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर धड़कने सर्द ना हो , दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ , आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार सुकून के पल ही… Read more
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मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से , लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है ! एक अजीब सी उदासी , चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है ! लोगों से दूर , सुनसान , फिर भी दिल में घमासान , ना जाने क्यूँ है ! बचपन का अकेलापन आज अभी तक… Read more
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To a heart racing , are you still into trading ? Trading of those bloomy sentiments into attachments ? And profiting it into detachments ? – From a broke soul @surbhisays Read more
