Surbhi Says

@surbhisays

heartbreak

  • अनंत है यह आसमाँ,किधर दर्द साँझा करूँ?हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह, बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays Read more

  • मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से , लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है ! एक अजीब सी उदासी , चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है ! लोगों से दूर , सुनसान , फिर भी दिल में घमासान , ना जाने क्यूँ है ! बचपन का अकेलापन आज अभी तक… Read more

  • To a heart racing , are you still into trading ? Trading of those bloomy sentiments into attachments ? And profiting it into detachments ? – From a broke soul @surbhisays Read more

  • And the plateaus of sigh , are growing high , With the meadows of happiness , thriving lifeless ! The dooming present , and persistant accentuating repent , strangulating the emotions ! The feels on edge , with no one to even pledge , Here’s the broke soul , summoning GOD to patch this hole… Read more

  • एक तरफ तू है , एक तरफ मै हूँ , एक ही दीवार के नीचे , सामने पड़ा गुलदस्ता बेज़ारी का , सँवार रहा गुलदान , दिया है तूने हर बार । सींच रहे जबरन , अखिर दिया तो तूने ही है तुम्हारी आदत और मैं सिर्फ कहावत खिले तन्हाई के गुल जिधर भंवरे की… Read more

  • फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी ! कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी देख , वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया ! पस्त पड़ा आत्मविश्वास , धड़कने बदहवास , यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श , धुंधला संदर्श मेरी औकात बता गया ! सुन लो ऐ हमराह… Read more

  • हर साल  हर नर्म दास्तान , लिपटा है यादों में हर वो इंसान , जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ । उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता । देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,सियाही में डूबा हुआ ,लिख… Read more

  • वादे थे सबके साथ ना छोड़ने के , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , गूंजती धड़कने , सिसकती साँसें , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , जिसे चाहो , वही दूर हो जाता , और ऐसे मेरा आत्मविश्वास भी मुझसे कह जाता कि , “देखो आज आँसू ही हाल पूछते है… Read more

  • इतना जुनूनी था प्यार मेरा कि , वफ़ादारी को गोद में पकड़े चलते रहे और तोलते रहे , ताकि उन्हें ढूँढ , दिखा सके और पूछ सके कि “यह वज़नी है या उनकी खूबसूरती !” @surbhisays Read more

  • तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में , किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने ! बिखरते , टूटते , चारों ओर , आ गए नजरों की ओर , चुभा ऐसा , कोना-कोना अंधकार जागा , आधा-पौना अंधी आँखें , टूटा दिल , हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल ! आत्मविश्वास दाव पर… Read more