रुख़सत कर दिया लगाव की रियासत को ,

दहशत का उफान , अलगाव कर दिया इसकी सियासत को !

सुकून की खुशबू धुंध सी ,

जैसे मौसम बदल , चल देती हवा सर्द सी !

आज़ादी की कोशिश , पहचान बनाने की ,

लग गई भावना , मचान बनाने में , “लगाव मुक्ति ” की !

डर था कि

लांग ना जाए दिल ये , मचान ऊँची नहीं ,

जकड़ ना ले दिल को , लगाव की लहर , सूची नहीं !

बारिश तेज और बाढ़ की संभावना ,

टूटती दीवार , लगाव को प्रस्तावना !

कि बहाना है दिल को , तो बहा लो ,

लेकिन बहते – बहते इसे तैरना सीखा दो । @surbhisays

शौक रखते थे हम आँखों की सुंदरता देखना का ,

पलके झपकते ही इन्तेज़ार करते थे , चार होने की स्थिरता का !

आँखें कुछ तो कह रही थी , अंदर ही अंदर सह रही थी !

बेसब्री से इन्तेज़ार हो रहा था ,

“अनदेखी” औज़ार वार कर रहा था !

बिलख-बिलख कर रो रही थी ,

बस मेरी ही आँखें यह कोलाहल पढ़ रही थी !

हँस कर मैंने उसका मजाक उड़ाया ,

“ड्रामा” बोल मेरी आँख , इस दर्द को हवा में फूँक आया !

समय ने ऐसा पलटा खाया ,

जब खुद की भीगी आँखों को कोई समेटने ना आया !

शौकिया मिजाज़ मेरा चकनाचूर हो गया ,

अजीब था यह शौक जो दर्द सिर्फ मजाक में सुनता ही रह गया !

भर रहे इस “शौक” का जुर्माना अभी तक ,

दिल टूट गया , लोगों ने छोड़ दिया , भरेंगे ऐसा हर्जाना कब तक !!

बहुत दर्द देती है ये आँखें ,

काश ! लफ़्ज़ों द्वारा बोल सकती , प्रायश्चित की दुआ , दिन और रातें ! @surbhisays

सोचा था हम खास बहुत होंगे ,

हमारी सादगी , वास्तविक रूप देख वो उल्लासित होंगे ,

सातवें आसमान पर तैर रही थी ,

लेकिन पता ना था कि धीरे-धीरे गैर हो रही थी !

हम सपने सुहाने भविष्य के सपने देख रहे थे ,

हर एक भावनायें , ज़ज्बात सेक रहे थे !

सोचा था एक दिन बात करते है ,

लेकिन ये सुन

वो हँसे ,

थोड़ा बरसे ,

अपने ज़ज्बात कसे ,

और इस तरह मेरे दिल से दग़ा, फरेबी की जड़े !

टूटा दिल मेरा , अकेलापन समेट रहा था ,

जकड़ कर उसे लपेट रहा था !

अब किसी पर विश्वास करने का मन नहीं करता ,

अंधविश्वास है ये प्यार अब जुड़ने का मन नहीं करता !

काश ये दर्द जल्दी कम हो जाए ,

प्यार से अब मेरे दिल की नजरबंदी हो जाए । @surbhisays

बहुत दर्द देता है ये अकेलापन ,

आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन !

चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द ,

गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द !

डरता है दिल साँझा करने से ,

क्या करे इतने धोखे बाद , डर गया है मरने से !

इन्तेज़ार मेरा खाली चला गया ,

प्यार से उगाया फूल , तार- तार कर गया !

बोला रख लेना इसकी पंखुड़ियां , सूखी , बेजान – तू इसी लायक है ,

मैंने पूछा सूखी पंखुड़ियां भी खुशबू देती, क्या कोई उम्मीद या दायक है?

हँसता रहा मेरी उम्मीद देख के ,

कहता तू पागल, बचकानी , तरस आता तेरा इन्तेज़ार देख के !

टूटा मेरा दिल बस मुझसे यही पूछता ,

“क्या कोई है जो तेरा हाथ पकड़ के बोले , ले मसल देता हूँ तेरे दिल के हिचकोले !” @surbhisays

हर कोई किसी के करीब है ,

लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है !

ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है ,

या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है !

आँखें नम और जुबान मौन है ,

क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है !

शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का ,

मारेगा , जलाएगा , लौह है वो उस चिंगारी का !

डरों नहीं प्यार है कोई औजार नहीं ,

थोड़ा जिद्दी है , बेज़ार नहीं !

अनोखा है , थोड़ा रुलाएगा ज़रूर ,

लेकिन ये प्यार है जनाब , मनाएगा ज़रूर । @surbhisays

बारिश भी बेमिसाल है ,

लेकिन कुछ तो इसके मन में मलाल है ,

कि लाखों करोड़ों आँसुओं के नक़ाब बनने का क्यूँ है मुझ पर इल्ज़ाम ,

शीतलता देना मेरा काम , फिर क्यूँ हूँ मैं बदनाम सुबह ओ शाम ?

विभिन्न प्रशन्न उनके मन को निचोड़ेते है ,

अपने ज़ज्बात मेरे से जोड़ते है !

जज़्बातों का सैलाब ,

जुबान बेताब!

इकरार करने से डर है ,

छूट जाने का कहर है!

चलो मेरे जरिए दुख कम हो जाता है ,

दिल का ज़ख्म अल्प हो जाता है !

कसम खाता हूँ ,

गुरूर नहीं करूंगा अपनी वफ़ादारी का ,

बेपर्दा ना करूंगा आपकी खुद्दारी का । @surbhisays

एहसास था वो धोखा ज़रूर देंगे ,

लेकिन कहीं दिल से निकली आवाज़ कहती , वो वफा ज़रूर उड़ेलेंगे ,

हम इन्तेज़ार करते रहे उनकी दस्तक का ,

लेकिन वो कहते हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे !

इन्तेज़ार मेरा खाली रह गया ,

ज़रूर मिलेंगे , ज़रूर मिलेंगे रह गया !

अकेले रहने की आदत को मन संभालेगा ,

संभालेगा, मजबूरी मान लेगा ,

मजबूरी मान लेगा , दिल संभालेगा

कि किसी को आदत ना बनाओ ,

अपने ज़ज्बात अपने दिल को सुनाओ ,

कोई किसी का होता नहीं ,

होता तो जज़्बातों को पैरों तले कुचलता नहीं ।@surbhisays