Surbhi Says

@surbhisays

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  • ईमानदारी का ताज़ पहने , बिन गलतियों के धिक्कार सहते , मौन हो गई हूँ | जटिल है यह जीवन, जहाँ हर इंसान   , चुभा रहा कठोरता , आजीवन | फिर भी, मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है , ना कोई सहारा, ना कोई संगी है। बस तेरी ही आस है,  हे ज़िंदगी ।… Read more

  • कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई , वो हँसती  खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays Read more

  • अनंत है यह आसमाँ,किधर दर्द साँझा करूँ?हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह, बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays Read more

  • कष्ट का रास्ता , रास्ता कहाँ ? पगडंडी है काँटों सनी वो कीड़े – मकोड़े , घनघोर अंधेरा , रोशनी निगल , अमावस्या घनी मंज़िल का चौराहा , चौराहा कहाँ ? भ्रमण है उलझनों भरी वो कांपते पाँव , बेचैनी अटकन , कुछ नहीं बस है ये सफलता की लड़ी । @surbhisays Read more

  • शोर है , तेज़ सा , दिल घबरा रहा है , दूर है सब , परहेज सा , रोज़ जता रहा है। क्रोध है , पुकार सा , घायल कर रहा है , झाँकता ना तू एक बार , कायल कर , “कटाक्ष” रहा है । दर्द है , उफान सा , कैद कर रहा… Read more