अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,
मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं ,

तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,
मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं !

रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,
कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी नहीं ? @surbhisays

जाने के बाद , मुड़ के देखा ना कर ,

क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ।

यूँ अपनी नजरों में इज्ज़त बनाना , थकान देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर दिन पसीने की बूंद , मुस्कान देती  ।

ना देख मुड़ कर ,
  क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ,

हर एक बुनी यादें दर्द बहुत देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर एक ज़ख़्म का दर्द , सुकून देती ,

मुड़ के देखा ना कर ,

क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए । @surbhisays

क्या फायदा उम्मीद रखने से ,

जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से !

आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से ,

तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से !

हर कोशिशें छोटी – छोटी ,

उम्मीदें मोटी – मोटी ,

कि शायद रिझा सके ,

सारी शर्तें सुलझा सके ,

लेकिन नजरबंदी है

मेरी कोशिशों से ,

एहसानमंदी है

निरंतर सिफारिशों से !

मना लिया अपने को कि ,

“दिल टूटा है , समय जोड़ देगा ,

ज़ज्बात लूटा है , आत्मविश्वास की होड़ , उसे पिरोह देगा ।”

कोशिशों से भागना बुजदिली है ,

यह दुनिया है , इधर हर भावनायें दलदली है ,

इसमें जबतक गिरेंगे नहीं तो निकलना कैसे सीखेंगे ,

एक बार हिम्मत करके निकल गए , तो अगली बार परखना कैसे समझेंगे । @surbhisays

अपने से नफ़रत का एहसास होना ,

हर पल घुटन की सास लेना ,

लोगों द्वारा शारीरिक सुंदरता के कदम छुना ,

और इस तरह आत्मविश्वास के पलकों का चूना ,

जीवन और मौत के रस्ते पर झूलने के बराबर है !

काश लोग एक बार दिल मे झाँक के देखते ,

की कैसे बसे है इसमें लोगों द्वारा दिए गए बेज्जती के राख के टुकड़े ,

प्रेम का स्पर्श चाहता है ,

अपनी सिर्फ अपनी ही सुंदरता के आदर्श पर रहता है ,

इन्तेज़ार है उसे की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,

की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,

चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,

बदलते ही सबने इसको नकारा है ,

दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,

सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays

हर कोई किसी के करीब है ,

लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है !

ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है ,

या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है !

आँखें नम और जुबान मौन है ,

क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है !

शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का ,

मारेगा , जलाएगा , लौह है वो उस चिंगारी का !

डरों नहीं प्यार है कोई औजार नहीं ,

थोड़ा जिद्दी है , बेज़ार नहीं !

अनोखा है , थोड़ा रुलाएगा ज़रूर ,

लेकिन ये प्यार है जनाब , मनाएगा ज़रूर । @surbhisays

एहसास था वो धोखा ज़रूर देंगे ,

लेकिन कहीं दिल से निकली आवाज़ कहती , वो वफा ज़रूर उड़ेलेंगे ,

हम इन्तेज़ार करते रहे उनकी दस्तक का ,

लेकिन वो कहते हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे !

इन्तेज़ार मेरा खाली रह गया ,

ज़रूर मिलेंगे , ज़रूर मिलेंगे रह गया !

अकेले रहने की आदत को मन संभालेगा ,

संभालेगा, मजबूरी मान लेगा ,

मजबूरी मान लेगा , दिल संभालेगा

कि किसी को आदत ना बनाओ ,

अपने ज़ज्बात अपने दिल को सुनाओ ,

कोई किसी का होता नहीं ,

होता तो जज़्बातों को पैरों तले कुचलता नहीं ।@surbhisays