ईमानदारी का ताज़ पहने ,

बिन गलतियों के धिक्कार सहते ,

मौन हो गई हूँ |

जटिल है यह जीवन,

जहाँ हर इंसान   ,

चुभा रहा कठोरता , आजीवन |

फिर भी,

मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है ,

ना कोई सहारा, ना कोई संगी है।

बस तेरी ही आस है,  हे ज़िंदगी ।

नयी राह और अकेलापन, यही तेरा उसूल है  |@surbhisays

इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,

की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,

चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,

बदलते ही सबने इसको नकारा है ,

दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,

सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays

बड़ी हलचल है मंज़िलों में, 
जैसे खो गया है कारवाँ
वो चकाचौंध होते साहिलों में
घुटती कला ,
जैसे एक से होते हज़ारवाँ। @surbhisays

अनंत है यह आसमाँ,
किधर दर्द साँझा करूँ?
हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह,
बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?
हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,
“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,
बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays

कष्ट का रास्ता ,

रास्ता कहाँ ? पगडंडी है काँटों सनी

वो कीड़े – मकोड़े , घनघोर अंधेरा ,

रोशनी निगल , अमावस्या घनी

मंज़िल का चौराहा ,

चौराहा कहाँ ? भ्रमण है उलझनों भरी

वो कांपते पाँव , बेचैनी अटकन ,

कुछ नहीं बस है ये सफलता की लड़ी । @surbhisays

शोर है , तेज़ सा ,

दिल घबरा रहा है ,

दूर है सब , परहेज सा ,

रोज़ जता रहा है।

क्रोध है , पुकार सा ,

घायल कर रहा है ,

झाँकता ना तू एक बार ,

कायल कर , “कटाक्ष” रहा है ।

दर्द है , उफान सा ,

कैद कर रहा है ,

दहाड़ है , शेर सा ,

हैसियत जता रहा है । @surbhisays

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the brightest light ,

Struggling and fighting ,

Battling to survive…

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the highest climb

Curling and gruelling ,

Clashing to survive…

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the loudest screech

Unwinding and detaching ,

Conquering each. @surbhisays

संघर्षो में गोते खाती जिंदगी,

संतुलन बना रही है ,

जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत ,

हर डर काट रही है ,

यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें

विश्वास दिला रही है , कि

तपिश ही है जो

साँस चला रही है । @surbhisays

क्यूँकी वो कहते है ना कि

कुर्बानी ऐसी करो की

पीछे मुड़ने में दर्द ना हो ,

यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर

धड़कने सर्द ना हो ,

दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ ,

आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की

नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार

सुकून के पल ही पल हो। @surbhisays