अनंत है यह आसमाँ,
किधर दर्द साँझा करूँ?
हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह,
बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?
हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,
“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,
बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays
lost
शोर है , तेज़ सा ,
दिल घबरा रहा है ,
दूर है सब , परहेज सा ,
रोज़ जता रहा है।
क्रोध है , पुकार सा ,
घायल कर रहा है ,
झाँकता ना तू एक बार ,
कायल कर , “कटाक्ष” रहा है ।
दर्द है , उफान सा ,
कैद कर रहा है ,
दहाड़ है , शेर सा ,
हैसियत जता रहा है । @surbhisays