moon
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चंदनिया तेरी आँख मिचौली , छुप क्यूँ रहा है वैसे ? बोला “मेरे माथे की मौलि , झुक कर देखा जाए कैसे? “ डर का पहरा तेरे चेहरे , “गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !” गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक , अल्हड़ मन , होता हिंसक ! “वो देख दाग ,हँसी का… Read more
