मुंतज़िर निगाहें , लेकिन
दिलों में अफवाहें , कि
मेरी दास्तान ए मोहब्बत ,
तेरे बेफिज़ुल मुड़ के देखने का अंजाम है। @surbhisays
मुंतज़िर निगाहें , लेकिन
दिलों में अफवाहें , कि
मेरी दास्तान ए मोहब्बत ,
तेरे बेफिज़ुल मुड़ के देखने का अंजाम है। @surbhisays
तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में ,
किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने !
बिखरते , टूटते , चारों ओर ,
आ गए नजरों की ओर ,
चुभा ऐसा , कोना-कोना
अंधकार जागा , आधा-पौना
अंधी आँखें , टूटा दिल ,
हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल !
आत्मविश्वास दाव पर लगा है ,
किस्मत का ऐलान , ” यही तेरी सज़ा है ! “
अरे! गलती बिना सज़ा कैसे ?
सपने देखा… सब के जैसे !
बोली किस्मत,
“आयेगा वही पास जो सच्चा चाहता तेरा साथ,
समुंदर की नमकीन उम्मीदें , ना देती गिरते हलक को हाथ । ” @surbhisays
यूँ ना हवाले करो अपनी नजरों की गुफ़्तगू को ,
कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए इश्क हो जाने का ,
घूँघट ओढ़े मुस्कान को ,
ऐसे न देखो ,
कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए जज्बातों के ऐलान हो जाने का ,
लोग जो भी कहे , लेकिन
तेरे इस तीरंदाजी के खेल में जीतना ,
पता नहीं क्यूँ नजारा धुँधला कर देता है ,
इज़हार नहीं आता , बस कुछ गुमसुम एहसास है ,
एक तरफा ज़ज्बात है , लेकिन
इल्ज़ाम लग जाने का डर , पता नहीं क्यूँ अच्छा लगता है। @surbhisays
चंदनिया तेरी आँख मिचौली ,
छुप क्यूँ रहा है वैसे ?
बोला “मेरे माथे की मौलि ,
झुक कर देखा जाए कैसे? “
डर का पहरा तेरे चेहरे ,
“गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !”
गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक ,
अल्हड़ मन , होता हिंसक !
“वो देख दाग ,हँसी का पात्र,
ताज पहन , छुपता राज़ “
हो जा तन्हा , बेहतर होगा ,
दाग तेरा ताज ,
तभी “सराहना” की परिभाषा होगा ! @surbhisays
I can never fit in a definition of “perfect girl , “
wanted to be but my “kismet” a twirl !
Why our life dependent on fate ?
Stranded in its arm , no abate ..
Everyone found their “perfect” perfectly bind.
Am I invisible ? left behind !
Striving everyday …. hoping
To accept me as well ,expectations loading ..
Yes I can never fit in the definition of “perfect girl ” !
Letting people watch , I fit in the definition of “perfect pearl ” . @surbhisays
अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,
मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं ,
तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,
मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं !
रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,
कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी नहीं ? @surbhisays
जाने के बाद , मुड़ के देखा ना कर ,
क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ।
यूँ अपनी नजरों में इज्ज़त बनाना , थकान देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर दिन पसीने की बूंद , मुस्कान देती ।
ना देख मुड़ कर ,
क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ,
हर एक बुनी यादें दर्द बहुत देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर एक ज़ख़्म का दर्द , सुकून देती ,
मुड़ के देखा ना कर ,
क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए । @surbhisays

छुपा है दर्द आँखों में ,
लटकी हुई है भावनायें हर शाखों पे ।
घुटन का एहसास हर दिन मारता है ,
क्या करे ! हर बार हर दिल अपनाने से नकारता है !
ठोकर खा फिर भी ये आँखें मुस्कराती है ,
लेकिन आँसुओं का बोझ , चक्रवाती है !
झाँक रही है भावनाएं इस उम्मीद में ,
कि इस दर्द को अपना , कोई तो खुशियों का झरोखा खोलदे ,
आज़ादी की खुशबू मेहका , इस दिल को अनोखा बोल दे । @surbhisays
बरकरार उम्मीदें , निष्ठावान है ,
बेकरार मुरादें , ऊर्जावान है ,
हठीली , जिद्दी , भिन्न – भिन्न प्रश्न ,
अड़ियल , सिद्धि , उत्तर से पूर्व जश्न ,
कि
खाली हाथ ना लौटेंगे ,
निश्चय साथ परचम लूटेंगे !
ना , काश सुनाई नहीं देता ,
हाँ , प्रकाश , शहनाई दिखाई देता !
मैंने पूछा उम्मीद से , ” संदेह की सुगंध आती है!”
हँस कर बोला ,
“मुश्किल से जागा है हारा हुआ विश्वास ,
सर झुका के रहेगा ये संदेह , जिधर हो सकारात्मकता का वास।” @surbhisays