जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई है और हम लाचार से हो गए है| इस हद तक खोखला सा हो गया है कि एक छोटे से कीड़े के जाने पर आँसू आ जाते है| बस इन्तेज़ार है और विनती है जिंदगी से थोड़ा नर्म हो जाने की 🙏@surbhisays
reality
देख लिया लोगों का “दबदबा” ,
देख लिया लोगों की झूठी “ऊंची पहचान”,
आज मुश्किल समय में सिर्फ साथ मांगा तो,उन्होंने पूछना ही बंद कर दिया !
बिनती है ,
कभी न बयान कर अपने गम,
हमारे दुख हमारे कर्म,
लोग दुख सुन कर फैसला कर देंगे,
लेकिन सुकून में रहना क्यूँकी,
वही बिगड़ता है तो वही संभालता है | surbhisays
बड़ी हलचल है मंज़िलों में,
जैसे खो गया है कारवाँ
वो चकाचौंध होते साहिलों में
घुटती कला ,
जैसे एक से होते हज़ारवाँ। @surbhisays