reality
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अब कोई हैरत नहीं होती, जब किस्मत मुख मोड़ती है,ज़िंदगी का बेरहम होना, तो अब रोज़ की बात लगती है। उदास नहीं हूँ मैं , बस अंदर से टूट गई हूँ,ज़िंदगी के इस अजीब खेल से, मैं बुरी तरह रूठ गई हूँ। जी रही हूँ मैं , बस जैसे-तैसे, ‘काश ऐसा होता, काश वैसा होता’,… Read more
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जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई… Read more
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देख लिया लोगों का “दबदबा” , देख लिया लोगों की झूठी “ऊंची पहचान”, आज मुश्किल समय में सिर्फ साथ मांगा तो,उन्होंने पूछना ही बंद कर दिया ! बिनती है , कभी न बयान कर अपने गम, हमारे दुख हमारे कर्म, लोग दुख सुन कर फैसला कर देंगे, लेकिन सुकून में रहना क्यूँकी, वही बिगड़ता है… Read more
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बड़ी हलचल है मंज़िलों में, जैसे खो गया है कारवाँ वो चकाचौंध होते साहिलों में घुटती कला ,जैसे एक से होते हज़ारवाँ। @surbhisays Read more
