शोर है , तेज़ सा ,
दिल घबरा रहा है ,
दूर है सब , परहेज सा ,
रोज़ जता रहा है।
क्रोध है , पुकार सा ,
घायल कर रहा है ,
झाँकता ना तू एक बार ,
कायल कर , “कटाक्ष” रहा है ।
दर्द है , उफान सा ,
कैद कर रहा है ,
दहाड़ है , शेर सा ,
हैसियत जता रहा है । @surbhisays