संघर्षो में गोते खाती जिंदगी,
संतुलन बना रही है ,
जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत ,
हर डर काट रही है ,
यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें
विश्वास दिला रही है , कि
तपिश ही है जो
साँस चला रही है । @surbhisays
संघर्षो में गोते खाती जिंदगी,
संतुलन बना रही है ,
जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत ,
हर डर काट रही है ,
यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें
विश्वास दिला रही है , कि
तपिश ही है जो
साँस चला रही है । @surbhisays

जलता सूरज ,
बादलों संग छुपन छुपाई खेलता ,
मुझे देख पूछता ,
” तेरे आँसू की वजह मै हूँ या कोई और ? ”
नादानी मे पगला बहुत सच्ची बात पूछ गया !
कैसे बताऊँ उसे टूटती उम्मीदों की दास्तान ,
जो कर ना पाया ये दिल उसका भुगतान ,
पता ना था कि उजाला कर देगा हाल -ए -दिल का ऐलान ,
और ऐसे खोल देगा मेरे आँसुओं की पहचान । @surbhisays