कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई ,
वो हँसती खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays
कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई ,
वो हँसती खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays
मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से ,
लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है !
एक अजीब सी उदासी ,
चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है !
लोगों से दूर , सुनसान ,
फिर भी दिल में घमासान ,
ना जाने क्यूँ है !
बचपन का अकेलापन आज
अभी तक इसका साथ पता नहीं क्यूँ है !
डरी , घबराई ,सहमी
आज भी नज़रअंदाजी , ना जाने क्यूँ है !
टूटा बिखरा पड़ा आत्मविश्वास , पता नहीं क्यूँ है!
चुप , शांत , ये खामोशी ना जाने क्यूँ है ,
अगर है भी तो ,
इसे चिल्ला- चिल्ला के मदद ना मांग पाना
पता नहीं क्यूँ है। @surbhisays

To a heart racing ,
are you still into trading ?
Trading of those bloomy sentiments into attachments ?
And profiting it into detachments ?
– From a broke soul @surbhisays
And the plateaus of sigh ,
are growing high ,
With the meadows of happiness ,
thriving lifeless !
The dooming present ,
and persistant accentuating repent ,
strangulating the emotions !
The feels on edge ,
with no one to even pledge ,
Here’s the broke soul ,
summoning GOD to patch this hole ! @surbhisays
एक तरफ तू है ,
एक तरफ मै हूँ ,
एक ही दीवार के नीचे ,
सामने पड़ा गुलदस्ता
बेज़ारी का ,
सँवार रहा गुलदान ,
दिया है तूने हर बार ।
सींच रहे जबरन ,
अखिर दिया तो तूने ही है
तुम्हारी आदत
और मैं सिर्फ कहावत
खिले तन्हाई के गुल
जिधर भंवरे की गुनगुनाहट
देख तेरी मुस्कराहट ,
और मेरे दिल की घबराहट ,
कि क्यूँ ?
एक तरफ़ा रिश्ता प्रश्न चिन्ह लगा जाता ,
कि बिना आग उम्मीद इसे सुलगा जाता । @surbhisays
फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी !
कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी
देख ,
वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया !
पस्त पड़ा आत्मविश्वास ,
धड़कने बदहवास ,
यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श ,
धुंधला संदर्श
मेरी औकात बता गया !
सुन लो ऐ हमराह ,
अकेला होना अधूरा नहीं ,
परछाई का साथ ,बुरा नहीं
ये जीवन की सूनी पगडंडी
अनजान है ,
कि हर मोड़ की खंडी
को छांट
डर बेजान है। @surbhisays
इतना जुनूनी था प्यार मेरा कि ,
वफ़ादारी को गोद में पकड़े
चलते रहे और तोलते रहे ,
ताकि उन्हें ढूँढ , दिखा सके और पूछ सके कि
“यह वज़नी है या उनकी खूबसूरती !” @surbhisays
And this time again I am inches away ,
Tears , loneliness of which my heart weighs ,
Never knew growing up will be spine chilling ,
Where hatred , destestation hatches everyday killing !
What’s my mistake , my heart aches ,
Non – acceptance , mind quakes !
Why always me ?
Am I that bad for everyone to flee ?
I have lot to say ,
But unfortunately I’m inaudible , invisible… that’s my dismay !
Still ,
Waiting for one warm commitment ,
To hold this heart called fulfillment ,
To render the emotions like shipment
and feelings like a persistent . @surbhisays
हर कोशिशें नाकाम है ,
पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है !
धैर्य की सीमा टूट रही हैं,
भावनाओं की डोर छूट रही है ,
रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं ,
सादगी परखना किसी को आता नहीं !
कसूर सिर्फ इतना है कि ,
अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है ,
लेकिन दूसरों से अपनापन , अंधकार जागता है । @surbhisays
नहीं है वजूद मेरा किसी के सामने ,
करीब हो के भी कोई ना आता यह हाथ थामने ,
देखो मुझे , मैं भी हूँ यही मौजूद ,
दिखती क्यूँ नहीं मैं , दस्तक के बावजूद ?
खास है ना सब , मेरे अलावा ..
अकेला ही रह गया मेरा बुलावा !
रोता है दिल मेरा , बिना शोर के ,
अफसोस , तयारी है तेरी परायी खुशी की , जोर शोर से ,
काश ! कोई मेहसूस कर सकता इस दर्द के बहाव को ,
तोड़ कर रोक पाता , मेरी इस उलझन के घेराव को । @surbhisays