Surbhi Says

@surbhisays

upset

  • अब कोई हैरत नहीं होती, जब किस्मत मुख मोड़ती है,ज़िंदगी का बेरहम होना, तो अब रोज़ की बात लगती है। उदास नहीं हूँ मैं , बस अंदर से टूट गई हूँ,ज़िंदगी के इस अजीब खेल से,  मैं बुरी तरह रूठ गई हूँ। जी रही हूँ मैं , बस जैसे-तैसे, ‘काश ऐसा होता, काश वैसा होता’,… Read more

  • कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई , वो हँसती  खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays Read more

  • मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से , लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है ! एक अजीब सी उदासी , चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है ! लोगों से दूर , सुनसान , फिर भी दिल में घमासान , ना जाने क्यूँ है ! बचपन का अकेलापन आज अभी तक… Read more

  • To a heart racing , are you still into trading ? Trading of those bloomy sentiments into attachments ? And profiting it into detachments ? – From a broke soul @surbhisays Read more

  • And the plateaus of sigh , are growing high , With the meadows of happiness , thriving lifeless ! The dooming present , and persistant accentuating repent , strangulating the emotions ! The feels on edge , with no one to even pledge , Here’s the broke soul , summoning GOD to patch this hole… Read more

  • एक तरफ तू है , एक तरफ मै हूँ , एक ही दीवार के नीचे , सामने पड़ा गुलदस्ता बेज़ारी का , सँवार रहा गुलदान , दिया है तूने हर बार । सींच रहे जबरन , अखिर दिया तो तूने ही है तुम्हारी आदत और मैं सिर्फ कहावत खिले तन्हाई के गुल जिधर भंवरे की… Read more

  • फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी ! कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी देख , वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया ! पस्त पड़ा आत्मविश्वास , धड़कने बदहवास , यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श , धुंधला संदर्श मेरी औकात बता गया ! सुन लो ऐ हमराह… Read more

  • इतना जुनूनी था प्यार मेरा कि , वफ़ादारी को गोद में पकड़े चलते रहे और तोलते रहे , ताकि उन्हें ढूँढ , दिखा सके और पूछ सके कि “यह वज़नी है या उनकी खूबसूरती !” @surbhisays Read more

  • And this time again I am inches away , Tears , loneliness of which my heart weighs , Never knew growing up will be spine chilling , Where hatred , destestation hatches everyday killing ! What’s my mistake , my heart aches , Non – acceptance , mind quakes ! Why always me ? Am… Read more

  • हर कोशिशें नाकाम है , पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है ! धैर्य की सीमा टूट रही हैं, भावनाओं की डोर छूट रही है , रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं , सादगी परखना किसी को आता नहीं ! कसूर सिर्फ इतना है कि , अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है , लेकिन दूसरों… Read more