कष्ट का रास्ता ,

रास्ता कहाँ ? पगडंडी है काँटों सनी

वो कीड़े – मकोड़े , घनघोर अंधेरा ,

रोशनी निगल , अमावस्या घनी

मंज़िल का चौराहा ,

चौराहा कहाँ ? भ्रमण है उलझनों भरी

वो कांपते पाँव , बेचैनी अटकन ,

कुछ नहीं बस है ये सफलता की लड़ी । @surbhisays

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