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अब कोई हैरत नहीं होती, जब किस्मत मुख मोड़ती है,ज़िंदगी का बेरहम होना, तो अब रोज़ की बात लगती है। उदास नहीं हूँ मैं , बस अंदर से टूट गई हूँ,ज़िंदगी के इस अजीब खेल से, मैं बुरी तरह रूठ गई हूँ। जी रही हूँ मैं , बस जैसे-तैसे, ‘काश ऐसा होता, काश वैसा होता’,… Read more
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जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई… Read more
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देख लिया लोगों का “दबदबा” , देख लिया लोगों की झूठी “ऊंची पहचान”, आज मुश्किल समय में सिर्फ साथ मांगा तो,उन्होंने पूछना ही बंद कर दिया ! बिनती है , कभी न बयान कर अपने गम, हमारे दुख हमारे कर्म, लोग दुख सुन कर फैसला कर देंगे, लेकिन सुकून में रहना क्यूँकी, वही बिगड़ता है… Read more
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ईमानदारी का ताज़ पहने , बिन गलतियों के धिक्कार सहते , मौन हो गई हूँ | जटिल है यह जीवन, जहाँ हर इंसान , चुभा रहा कठोरता , आजीवन | फिर भी, मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है , ना कोई सहारा, ना कोई संगी है। बस तेरी ही आस है, हे ज़िंदगी ।… Read more
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कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई , वो हँसती खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays Read more
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And in the whirlpool of sorrow , Dwells the brightest light Struggling and fighting, Battling to survive @surbhisays Read more
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A heavy feel on breath.. A heavy feel on eyes.. A heavy feel on heart… Body odours like a carcass.. Walking down the street.. Dehydrated! A dead plant too needs water to gain life.. where’s the gardener? ( a help) where’s the sunshine? ( a hope) where’s the love? ( a motivation) where’s life? (… Read more
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इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे , की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है , चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है , बदलते ही सबने इसको नकारा है , दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं , सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना ,… Read more
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बड़ी हलचल है मंज़िलों में, जैसे खो गया है कारवाँ वो चकाचौंध होते साहिलों में घुटती कला ,जैसे एक से होते हज़ारवाँ। @surbhisays Read more
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अनंत है यह आसमाँ,किधर दर्द साँझा करूँ?हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह, बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays Read more
