Surbhi Says

@surbhisays

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  • कष्ट का रास्ता , रास्ता कहाँ ? पगडंडी है काँटों सनी वो कीड़े – मकोड़े , घनघोर अंधेरा , रोशनी निगल , अमावस्या घनी मंज़िल का चौराहा , चौराहा कहाँ ? भ्रमण है उलझनों भरी वो कांपते पाँव , बेचैनी अटकन , कुछ नहीं बस है ये सफलता की लड़ी । @surbhisays Read more

  • शोर है , तेज़ सा , दिल घबरा रहा है , दूर है सब , परहेज सा , रोज़ जता रहा है। क्रोध है , पुकार सा , घायल कर रहा है , झाँकता ना तू एक बार , कायल कर , “कटाक्ष” रहा है । दर्द है , उफान सा , कैद कर रहा… Read more

  • And in the whirlpool of sorrow , Lives the brightest light , Struggling and fighting , Battling to survive… And in the whirlpool of sorrow , Lives the highest climb Curling and gruelling , Clashing to survive… And in the whirlpool of sorrow , Lives the loudest screech Unwinding and detaching , Conquering each. @surbhisays Read more

  • संघर्षो में गोते खाती जिंदगी, संतुलन बना रही है , जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत , हर डर काट रही है , यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें विश्वास दिला रही है , कि तपिश ही है जो साँस चला रही है । @surbhisays Read more

  • क्यूँकी वो कहते है ना कि कुर्बानी ऐसी करो की पीछे मुड़ने में दर्द ना हो , यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर धड़कने सर्द ना हो , दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ , आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार सुकून के पल ही… Read more

  • मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से , लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है ! एक अजीब सी उदासी , चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है ! लोगों से दूर , सुनसान , फिर भी दिल में घमासान , ना जाने क्यूँ है ! बचपन का अकेलापन आज अभी तक… Read more

  • बारिश की बौछार से भीगा हुआ मेरा दिल , धूप की गुनगुनाहट से ,सेंकता हुआ मेरा दिल , तेज़ हवाओं की थपेड़ों से चीरता हुआ मेरा दिल ,झुंझलाहट की मार से थका हुआ मेरा दिल , तेरे साथ होने के एहसास से ,सब सह लेना चाहता मेरा दिल , तेरी मोहब्बत से बुने घरौंदा से… Read more

  • To a heart racing , are you still into trading ? Trading of those bloomy sentiments into attachments ? And profiting it into detachments ? – From a broke soul @surbhisays Read more

  • And the plateaus of sigh , are growing high , With the meadows of happiness , thriving lifeless ! The dooming present , and persistant accentuating repent , strangulating the emotions ! The feels on edge , with no one to even pledge , Here’s the broke soul , summoning GOD to patch this hole… Read more

  • एक तरफ तू है , एक तरफ मै हूँ , एक ही दीवार के नीचे , सामने पड़ा गुलदस्ता बेज़ारी का , सँवार रहा गुलदान , दिया है तूने हर बार । सींच रहे जबरन , अखिर दिया तो तूने ही है तुम्हारी आदत और मैं सिर्फ कहावत खिले तन्हाई के गुल जिधर भंवरे की… Read more