Surbhi Says

@surbhisays

emotions

  • फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी ! कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी देख , वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया ! पस्त पड़ा आत्मविश्वास , धड़कने बदहवास , यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श , धुंधला संदर्श मेरी औकात बता गया ! सुन लो ऐ हमराह… Read more

  • हर साल  हर नर्म दास्तान , लिपटा है यादों में हर वो इंसान , जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ । उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता । देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,सियाही में डूबा हुआ ,लिख… Read more

  • वादे थे सबके साथ ना छोड़ने के , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , गूंजती धड़कने , सिसकती साँसें , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , जिसे चाहो , वही दूर हो जाता , और ऐसे मेरा आत्मविश्वास भी मुझसे कह जाता कि , “देखो आज आँसू ही हाल पूछते है… Read more

  • जुनून – ए इश्क की क़ैफ़ियत पूछो ना हमसे , कि मझधार फसी भावनाओं की कश्ती , ज़लालत में डूब गई ! @surbhisays Read more

  • इतना जुनूनी था प्यार मेरा कि , वफ़ादारी को गोद में पकड़े चलते रहे और तोलते रहे , ताकि उन्हें ढूँढ , दिखा सके और पूछ सके कि “यह वज़नी है या उनकी खूबसूरती !” @surbhisays Read more

  • तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में , किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने ! बिखरते , टूटते , चारों ओर , आ गए नजरों की ओर , चुभा ऐसा , कोना-कोना अंधकार जागा , आधा-पौना अंधी आँखें , टूटा दिल , हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल ! आत्मविश्वास दाव पर… Read more

  • उधर लोगों की शर्तों में सूरत और सीरत , दौड़ पड़े है मैदान में , इधर दिल चुनाव किए इन्तेज़ार में कि कब वह शर्तों का खेल बंद करेंगे और हमें ऐसे ही अपना लेंगे । @surbhisays Read more

  • यूँ ना हवाले करो अपनी नजरों की गुफ़्तगू को , कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए इश्क हो जाने का , घूँघट ओढ़े मुस्कान को , ऐसे न देखो , कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए जज्बातों के ऐलान हो जाने का , लोग जो भी कहे , लेकिन तेरे इस तीरंदाजी के खेल में… Read more

  • खोखला कर रहा ये अकेलापन, घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन ! सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ? मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ? अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था , आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था , साथ की… Read more

  • चंदनिया तेरी आँख मिचौली , छुप क्यूँ रहा है वैसे ? बोला “मेरे माथे की मौलि , झुक कर देखा जाए कैसे? “ डर का पहरा तेरे चेहरे , “गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !” गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक , अल्हड़ मन , होता हिंसक ! “वो देख दाग ,हँसी का… Read more