नहीं है वजूद मेरा किसी के सामने ,

करीब हो के भी कोई ना आता यह हाथ थामने ,

देखो मुझे , मैं भी हूँ यही मौजूद ,

दिखती क्यूँ नहीं मैं , दस्तक के बावजूद ?

खास है ना सब , मेरे अलावा ..

अकेला ही रह गया मेरा बुलावा !

रोता है दिल मेरा , बिना शोर के ,

अफसोस , तयारी है तेरी परायी खुशी की , जोर शोर से ,

काश ! कोई मेहसूस कर सकता इस दर्द के बहाव को ,

तोड़ कर रोक पाता , मेरी इस उलझन के घेराव को । @surbhisays

होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है ,

साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है ,

रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है ,

चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ”

गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है ,

ये हारा दिल , हर दिन ताने सेहता है

इस तरह आँसुओं का दर्द , मौन सा बहता है ,

बिखरा पड़ा है ज़ज्बात मेरा , साँसे भीख माँगती है ,

इन्तेज़ार है सिर्फ एक सम्मान का , मौत तक जिसे देख कांपती है । @surbhisays

अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,
मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं ,

तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,
मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं !

रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,
कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी नहीं ? @surbhisays

जाने के बाद , मुड़ के देखा ना कर ,

क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ।

यूँ अपनी नजरों में इज्ज़त बनाना , थकान देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर दिन पसीने की बूंद , मुस्कान देती  ।

ना देख मुड़ कर ,
  क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए ,

हर एक बुनी यादें दर्द बहुत देती ,
लेकिन जाने क्यूँ हर एक ज़ख़्म का दर्द , सुकून देती ,

मुड़ के देखा ना कर ,

क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,
मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए । @surbhisays

टूटा था वो काँच आदतों का ,

तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना,

जिधर चुभा ना था , चाहतों का बोना ,

आँसुओं से लत पत , दौड़ता दर्द ,

घबराहट , उलझन , दुखों का ज़र्द ।

टूटा था वो काँच आदतों का

तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना ,

जो समझा ना था , धोखे का होना ,

साँसों का उखाड़ना , गहरा ज़ख़्म ,

गिरती , टूटती भावनाओं , कोशिशें खत्म।

टूटा था वो काँच आदतों का ,

तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना, 

जो स्वीकार लिया था वर्तमान , आखिरी बार रोना ,

गिर गया था समय के पांव में ,

मना लिया था रहना टिक -टिक की छांव में ।

टूटा था वो काँच आदतों का ,

तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना । @surbhisays

And at the end of the day , I receive gifts ,

which life says you should never miss ,

Well packed and adorned ,

Excited , I glored ..

I opened and… BOOM !!

It was a packet full of doom ..

I smiled with a blurry perception ,

Realizing , I was under heavy deception !

That a talented girl is a lifetime girl ,

Full of opportunities , which uncurls ,

People helping ,

Friends accepting ,

Love protecting ,

But no !! I was wrong !

Accepting me , is not prolonged ..

Sometimes life’s unfair ,

Gives everything but unfortunately mine is impair ! @surbhisays

मुट्ठी बराबर दिल ,

भावनाओं का बिल ,

एहसासों का उतार चढ़ाव ,

प्यार का ठहराव बढ़ाव ,

उत्साहित मन ,

चेहरा सन्न ,

डर की लहर ,

तेज दौड़ती उम्मीदों की सहर ,

इज़हार का सुनहरा मौका ,

लेकिन आँसुओं में तैरती , नफ़रत की नौका !

पवित्रता का कत्ल ,

कोशिशें दफ़न !

सन्नाटा … गूँजती धड़कन ,

प्रश्नन… क्यूँ भगवन ? @surbhisays

छुपा है दर्द आँखों में ,

लटकी हुई है भावनायें हर शाखों पे ।

घुटन का एहसास हर दिन मारता है ,

क्या करे ! हर बार हर दिल अपनाने से नकारता है !

ठोकर खा फिर भी ये आँखें मुस्कराती है ,

लेकिन आँसुओं का बोझ , चक्रवाती है !

झाँक रही है भावनाएं इस उम्मीद में ,

कि इस दर्द को अपना , कोई तो खुशियों का झरोखा खोलदे ,

आज़ादी की खुशबू मेहका , इस दिल को अनोखा बोल दे । @surbhisays

रुख़सत कर दिया लगाव की रियासत को ,

दहशत का उफान , अलगाव कर दिया इसकी सियासत को !

सुकून की खुशबू धुंध सी ,

जैसे मौसम बदल , चल देती हवा सर्द सी !

आज़ादी की कोशिश , पहचान बनाने की ,

लग गई भावना , मचान बनाने में , “लगाव मुक्ति ” की !

डर था कि

लांग ना जाए दिल ये , मचान ऊँची नहीं ,

जकड़ ना ले दिल को , लगाव की लहर , सूची नहीं !

बारिश तेज और बाढ़ की संभावना ,

टूटती दीवार , लगाव को प्रस्तावना !

कि बहाना है दिल को , तो बहा लो ,

लेकिन बहते – बहते इसे तैरना सीखा दो । @surbhisays

क्या फायदा उम्मीद रखने से ,

जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से !

आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से ,

तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से !

हर कोशिशें छोटी – छोटी ,

उम्मीदें मोटी – मोटी ,

कि शायद रिझा सके ,

सारी शर्तें सुलझा सके ,

लेकिन नजरबंदी है

मेरी कोशिशों से ,

एहसानमंदी है

निरंतर सिफारिशों से !

मना लिया अपने को कि ,

“दिल टूटा है , समय जोड़ देगा ,

ज़ज्बात लूटा है , आत्मविश्वास की होड़ , उसे पिरोह देगा ।”

कोशिशों से भागना बुजदिली है ,

यह दुनिया है , इधर हर भावनायें दलदली है ,

इसमें जबतक गिरेंगे नहीं तो निकलना कैसे सीखेंगे ,

एक बार हिम्मत करके निकल गए , तो अगली बार परखना कैसे समझेंगे । @surbhisays