Surbhi Says

@surbhisays

feelings

  • उधर लोगों की शर्तों में सूरत और सीरत , दौड़ पड़े है मैदान में , इधर दिल चुनाव किए इन्तेज़ार में कि कब वह शर्तों का खेल बंद करेंगे और हमें ऐसे ही अपना लेंगे । @surbhisays Read more

  • यूँ ना हवाले करो अपनी नजरों की गुफ़्तगू को , कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए इश्क हो जाने का , घूँघट ओढ़े मुस्कान को , ऐसे न देखो , कि इल्ज़ाम हम पे लग जाए जज्बातों के ऐलान हो जाने का , लोग जो भी कहे , लेकिन तेरे इस तीरंदाजी के खेल में… Read more

  • चंदनिया तेरी आँख मिचौली , छुप क्यूँ रहा है वैसे ? बोला “मेरे माथे की मौलि , झुक कर देखा जाए कैसे? “ डर का पहरा तेरे चेहरे , “गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !” गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक , अल्हड़ मन , होता हिंसक ! “वो देख दाग ,हँसी का… Read more

  • I can never fit in a definition of “perfect girl , “ wanted to be but my “kismet” a twirl ! Why our life dependent on fate ? Stranded in its arm , no abate .. Everyone found their “perfect” perfectly bind. Am I invisible ? left behind ! Striving everyday …. hoping To accept… Read more

  • And this time again I am inches away , Tears , loneliness of which my heart weighs , Never knew growing up will be spine chilling , Where hatred , destestation hatches everyday killing ! What’s my mistake , my heart aches , Non – acceptance , mind quakes ! Why always me ? Am… Read more

  • हर कोशिशें नाकाम है , पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है ! धैर्य की सीमा टूट रही हैं, भावनाओं की डोर छूट रही है , रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं , सादगी परखना किसी को आता नहीं ! कसूर सिर्फ इतना है कि , अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है , लेकिन दूसरों… Read more

  • नहीं है वजूद मेरा किसी के सामने , करीब हो के भी कोई ना आता यह हाथ थामने , देखो मुझे , मैं भी हूँ यही मौजूद , दिखती क्यूँ नहीं मैं , दस्तक के बावजूद ? खास है ना सब , मेरे अलावा .. अकेला ही रह गया मेरा बुलावा ! रोता है दिल… Read more

  • होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है , साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है , रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है , चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ” गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है , ये हारा… Read more

  • अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं , तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं ! रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी… Read more

  • जाने के बाद , मुड़ के देखा ना कर , क्या पता ये भावनायें बेवफ़ा हो जाए ,मुड़ के वापस से बिनती में लग जाए । यूँ अपनी नजरों में इज्ज़त बनाना , थकान देती ,लेकिन जाने क्यूँ हर दिन पसीने की बूंद , मुस्कान देती  । ना देख मुड़ कर ,  क्या पता ये… Read more