उधर लोगों की शर्तों में
सूरत और सीरत ,
दौड़ पड़े है मैदान में ,
इधर दिल चुनाव किए
इन्तेज़ार में
कि कब वह शर्तों का खेल बंद करेंगे और हमें ऐसे ही अपना लेंगे । @surbhisays
उधर लोगों की शर्तों में
सूरत और सीरत ,
दौड़ पड़े है मैदान में ,
इधर दिल चुनाव किए
इन्तेज़ार में
कि कब वह शर्तों का खेल बंद करेंगे और हमें ऐसे ही अपना लेंगे । @surbhisays
खोखला कर रहा ये अकेलापन,
घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन !
सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ?
मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ?
अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था ,
आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था ,
साथ की जरूरत , पुकारती है ,
जिंदगी के कांटे , मारती है ,
क्यूँ ? क्यूँ ? प्रश्नों का सैलाब … रुकता नहीं ,
मुझे पा के किसी को उत्सुकता नहीं । @surbhisays
I can never fit in a definition of “perfect girl , “
wanted to be but my “kismet” a twirl !
Why our life dependent on fate ?
Stranded in its arm , no abate ..
Everyone found their “perfect” perfectly bind.
Am I invisible ? left behind !
Striving everyday …. hoping
To accept me as well ,expectations loading ..
Yes I can never fit in the definition of “perfect girl ” !
Letting people watch , I fit in the definition of “perfect pearl ” . @surbhisays
And this time again I am inches away ,
Tears , loneliness of which my heart weighs ,
Never knew growing up will be spine chilling ,
Where hatred , destestation hatches everyday killing !
What’s my mistake , my heart aches ,
Non – acceptance , mind quakes !
Why always me ?
Am I that bad for everyone to flee ?
I have lot to say ,
But unfortunately I’m inaudible , invisible… that’s my dismay !
Still ,
Waiting for one warm commitment ,
To hold this heart called fulfillment ,
To render the emotions like shipment
and feelings like a persistent . @surbhisays
हर कोशिशें नाकाम है ,
पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है !
धैर्य की सीमा टूट रही हैं,
भावनाओं की डोर छूट रही है ,
रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं ,
सादगी परखना किसी को आता नहीं !
कसूर सिर्फ इतना है कि ,
अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है ,
लेकिन दूसरों से अपनापन , अंधकार जागता है । @surbhisays
नहीं है वजूद मेरा किसी के सामने ,
करीब हो के भी कोई ना आता यह हाथ थामने ,
देखो मुझे , मैं भी हूँ यही मौजूद ,
दिखती क्यूँ नहीं मैं , दस्तक के बावजूद ?
खास है ना सब , मेरे अलावा ..
अकेला ही रह गया मेरा बुलावा !
रोता है दिल मेरा , बिना शोर के ,
अफसोस , तयारी है तेरी परायी खुशी की , जोर शोर से ,
काश ! कोई मेहसूस कर सकता इस दर्द के बहाव को ,
तोड़ कर रोक पाता , मेरी इस उलझन के घेराव को । @surbhisays
होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है ,
साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है ,
रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है ,
चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ”
गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है ,
ये हारा दिल , हर दिन ताने सेहता है
इस तरह आँसुओं का दर्द , मौन सा बहता है ,
बिखरा पड़ा है ज़ज्बात मेरा , साँसे भीख माँगती है ,
इन्तेज़ार है सिर्फ एक सम्मान का , मौत तक जिसे देख कांपती है । @surbhisays
अपनी खुशी की दुनिया में मुझे घुमाया नहीं ,
मेरे जज़्बातों को कभी अपनाया नहीं ,
तेरे दिल ने तारीफें कभी गिनाया नहीं ,
मैं अकेली , तूने रिश्ता कभी निभाया नहीं !
रोती रही लेकिन हमने जताया भी नहीं ,
कि एक जुड़ाव था , जो खो दिया , हँसता रहा तू , जरा सा पछताया भी नहीं ? @surbhisays
And at the end of the day , I receive gifts ,
which life says you should never miss ,
Well packed and adorned ,
Excited , I glored ..
I opened and… BOOM !!
It was a packet full of doom ..
I smiled with a blurry perception ,
Realizing , I was under heavy deception !
That a talented girl is a lifetime girl ,
Full of opportunities , which uncurls ,
People helping ,
Friends accepting ,
Love protecting ,
But no !! I was wrong !
Accepting me , is not prolonged ..
Sometimes life’s unfair ,
Gives everything but unfortunately mine is impair ! @surbhisays
मुट्ठी बराबर दिल ,
भावनाओं का बिल ,
एहसासों का उतार चढ़ाव ,
प्यार का ठहराव बढ़ाव ,
उत्साहित मन ,
चेहरा सन्न ,
डर की लहर ,
तेज दौड़ती उम्मीदों की सहर ,
इज़हार का सुनहरा मौका ,
लेकिन आँसुओं में तैरती , नफ़रत की नौका !
पवित्रता का कत्ल ,
कोशिशें दफ़न !
सन्नाटा … गूँजती धड़कन ,
प्रश्नन… क्यूँ भगवन ? @surbhisays