इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,
की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,
चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,
बदलते ही सबने इसको नकारा है ,
दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,
सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays
independent
अनंत है यह आसमाँ,
किधर दर्द साँझा करूँ?
हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह,
बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?
हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,
“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,
बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays
शोर है , तेज़ सा ,
दिल घबरा रहा है ,
दूर है सब , परहेज सा ,
रोज़ जता रहा है।
क्रोध है , पुकार सा ,
घायल कर रहा है ,
झाँकता ना तू एक बार ,
कायल कर , “कटाक्ष” रहा है ।
दर्द है , उफान सा ,
कैद कर रहा है ,
दहाड़ है , शेर सा ,
हैसियत जता रहा है । @surbhisays
फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी !
कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी
देख ,
वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया !
पस्त पड़ा आत्मविश्वास ,
धड़कने बदहवास ,
यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श ,
धुंधला संदर्श
मेरी औकात बता गया !
सुन लो ऐ हमराह ,
अकेला होना अधूरा नहीं ,
परछाई का साथ ,बुरा नहीं
ये जीवन की सूनी पगडंडी
अनजान है ,
कि हर मोड़ की खंडी
को छांट
डर बेजान है। @surbhisays
हर साल हर नर्म दास्तान ,
लिपटा है यादों में हर वो इंसान ,
जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ ।
उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,
की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता ।
देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,
सियाही में डूबा हुआ ,
लिख रहे है दिल का छुआ…
इस उम्मीद में कि
पंख में फँसे बोझ कम हो जाएंगे
हिम्मत के धागे इसे वापस सिल पाएंगे। @surbhisays
तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में ,
किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने !
बिखरते , टूटते , चारों ओर ,
आ गए नजरों की ओर ,
चुभा ऐसा , कोना-कोना
अंधकार जागा , आधा-पौना
अंधी आँखें , टूटा दिल ,
हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल !
आत्मविश्वास दाव पर लगा है ,
किस्मत का ऐलान , ” यही तेरी सज़ा है ! “
अरे! गलती बिना सज़ा कैसे ?
सपने देखा… सब के जैसे !
बोली किस्मत,
“आयेगा वही पास जो सच्चा चाहता तेरा साथ,
समुंदर की नमकीन उम्मीदें , ना देती गिरते हलक को हाथ । ” @surbhisays
प्रश्नोत्तर
चंदनिया तेरी आँख मिचौली ,
छुप क्यूँ रहा है वैसे ?
बोला “मेरे माथे की मौलि ,
झुक कर देखा जाए कैसे? “
डर का पहरा तेरे चेहरे ,
“गिरता ताज ठिठोली के मोहरे !”
गिर जाने दे , दो पल के प्रशंसक ,
अल्हड़ मन , होता हिंसक !
“वो देख दाग ,हँसी का पात्र,
ताज पहन , छुपता राज़ “
हो जा तन्हा , बेहतर होगा ,
दाग तेरा ताज ,
तभी “सराहना” की परिभाषा होगा ! @surbhisays
I can never fit in a definition of “perfect girl , “
wanted to be but my “kismet” a twirl !
Why our life dependent on fate ?
Stranded in its arm , no abate ..
Everyone found their “perfect” perfectly bind.
Am I invisible ? left behind !
Striving everyday …. hoping
To accept me as well ,expectations loading ..
Yes I can never fit in the definition of “perfect girl ” !
Letting people watch , I fit in the definition of “perfect pearl ” . @surbhisays
And this time again I am inches away ,
Tears , loneliness of which my heart weighs ,
Never knew growing up will be spine chilling ,
Where hatred , destestation hatches everyday killing !
What’s my mistake , my heart aches ,
Non – acceptance , mind quakes !
Why always me ?
Am I that bad for everyone to flee ?
I have lot to say ,
But unfortunately I’m inaudible , invisible… that’s my dismay !
Still ,
Waiting for one warm commitment ,
To hold this heart called fulfillment ,
To render the emotions like shipment
and feelings like a persistent . @surbhisays
होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है ,
साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है ,
रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है ,
चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ”
गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है ,
ये हारा दिल , हर दिन ताने सेहता है
इस तरह आँसुओं का दर्द , मौन सा बहता है ,
बिखरा पड़ा है ज़ज्बात मेरा , साँसे भीख माँगती है ,
इन्तेज़ार है सिर्फ एक सम्मान का , मौत तक जिसे देख कांपती है । @surbhisays