जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई है और हम लाचार से हो गए है| इस हद तक खोखला सा हो गया है कि एक छोटे से कीड़े के जाने पर आँसू आ जाते है| बस इन्तेज़ार है और विनती है जिंदगी से थोड़ा नर्म हो जाने की 🙏@surbhisays

अनंत है यह आसमाँ,
किधर दर्द साँझा करूँ?
हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह,
बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?
हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,
“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,
बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays

क्यूँकी वो कहते है ना कि

कुर्बानी ऐसी करो की

पीछे मुड़ने में दर्द ना हो ,

यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर

धड़कने सर्द ना हो ,

दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ ,

आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की

नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार

सुकून के पल ही पल हो। @surbhisays

मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से ,

लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है !

एक अजीब सी उदासी ,

चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है !

लोगों से दूर , सुनसान ,

फिर भी दिल में घमासान ,

ना जाने क्यूँ है !

बचपन का अकेलापन आज

अभी तक इसका साथ पता नहीं क्यूँ है !

डरी , घबराई ,सहमी

आज भी नज़रअंदाजी , ना जाने क्यूँ है !

टूटा बिखरा पड़ा आत्मविश्वास , पता नहीं क्यूँ है!

चुप , शांत , ये खामोशी ना जाने क्यूँ है ,

अगर है भी तो ,

इसे चिल्ला- चिल्ला के मदद ना मांग पाना

पता नहीं क्यूँ है। @surbhisays

To a heart racing ,

are you still into trading ?

Trading of those bloomy sentiments into attachments ?

And profiting it into detachments ?

From a broke soul @surbhisays

And the plateaus of sigh ,

are growing high ,

With the meadows of happiness ,

thriving lifeless !

The dooming present ,

and persistant accentuating repent ,

strangulating the emotions !

The feels on edge ,

with no one to even pledge ,

Here’s the broke soul ,

summoning GOD to patch this hole ! @surbhisays

एक तरफ तू है ,

एक तरफ मै हूँ ,

एक ही दीवार के नीचे ,

सामने पड़ा गुलदस्ता

बेज़ारी का ,

सँवार रहा गुलदान ,

दिया है तूने हर बार ।

सींच रहे जबरन ,

अखिर दिया तो तूने ही है

तुम्हारी आदत

और मैं सिर्फ कहावत

खिले तन्हाई के गुल

जिधर भंवरे की गुनगुनाहट

देख तेरी मुस्कराहट ,

और मेरे दिल की घबराहट ,

कि क्यूँ ?

एक तरफ़ा रिश्ता प्रश्न चिन्ह लगा जाता ,

कि बिना आग उम्मीद इसे सुलगा जाता । @surbhisays



फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी !

कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी

देख ,

वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया !

पस्त पड़ा आत्मविश्वास ,

धड़कने बदहवास ,

यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श ,

धुंधला संदर्श

मेरी औकात बता गया !

सुन लो ऐ हमराह ,

अकेला होना अधूरा नहीं ,

परछाई का साथ ,बुरा नहीं

ये जीवन की सूनी पगडंडी

अनजान है ,

कि हर मोड़ की खंडी

को छांट

डर बेजान है। @surbhisays

हर साल  हर नर्म दास्तान ,

लिपटा है यादों में हर वो इंसान ,

जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ ।

उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,
की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता ।

देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,
सियाही में डूबा हुआ ,
लिख रहे है दिल का छुआ…

इस उम्मीद में कि

पंख में फँसे बोझ कम हो जाएंगे
हिम्मत के धागे इसे वापस सिल पाएंगे। @surbhisays

इतना जुनूनी था प्यार मेरा कि ,

वफ़ादारी को गोद में पकड़े

चलते रहे और तोलते रहे ,

ताकि उन्हें ढूँढ , दिखा सके और पूछ सके कि

“यह वज़नी है या उनकी खूबसूरती !” @surbhisays