poetry
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ईमानदारी का ताज़ पहने , बिन गलतियों के धिक्कार सहते , मौन हो गई हूँ | जटिल है यह जीवन, जहाँ हर इंसान , चुभा रहा कठोरता , आजीवन | फिर भी, मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है , ना कोई सहारा, ना कोई संगी है। बस तेरी ही आस है, हे ज़िंदगी ।… Read more
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And in the whirlpool of sorrow , Dwells the brightest light Struggling and fighting, Battling to survive @surbhisays Read more
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शोर है , तेज़ सा , दिल घबरा रहा है , दूर है सब , परहेज सा , रोज़ जता रहा है। क्रोध है , पुकार सा , घायल कर रहा है , झाँकता ना तू एक बार , कायल कर , “कटाक्ष” रहा है । दर्द है , उफान सा , कैद कर रहा… Read more
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And in the whirlpool of sorrow , Lives the brightest light , Struggling and fighting , Battling to survive… And in the whirlpool of sorrow , Lives the highest climb Curling and gruelling , Clashing to survive… And in the whirlpool of sorrow , Lives the loudest screech Unwinding and detaching , Conquering each. @surbhisays Read more
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संघर्षो में गोते खाती जिंदगी, संतुलन बना रही है , जिद्दी हठी जूनूनी मेहनत , हर डर काट रही है , यह गुनगुनी धूप सेकती लहरें विश्वास दिला रही है , कि तपिश ही है जो साँस चला रही है । @surbhisays Read more
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क्यूँकी वो कहते है ना कि कुर्बानी ऐसी करो की पीछे मुड़ने में दर्द ना हो , यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर धड़कने सर्द ना हो , दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ , आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार सुकून के पल ही… Read more
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मुलाकातें तो बहुत हुई है अधूरेपन से , लेकिन आज यह इतने पास ना जाने क्यूँ है ! एक अजीब सी उदासी , चेहरे पर ठहरी , पता नहीं क्यूँ है ! लोगों से दूर , सुनसान , फिर भी दिल में घमासान , ना जाने क्यूँ है ! बचपन का अकेलापन आज अभी तक… Read more
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And the plateaus of sigh , are growing high , With the meadows of happiness , thriving lifeless ! The dooming present , and persistant accentuating repent , strangulating the emotions ! The feels on edge , with no one to even pledge , Here’s the broke soul , summoning GOD to patch this hole… Read more
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फिर से वो जीत गये और मैं हार गयी ! कितनी खुशी की बात है ना तेरे लिए जिंदगी देख , वो बचपन का अकेलापन , आज हमराह बन गया ! पस्त पड़ा आत्मविश्वास , धड़कने बदहवास , यूँ ज़ुबान मे नमकीन स्पर्श , धुंधला संदर्श मेरी औकात बता गया ! सुन लो ऐ हमराह… Read more
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वादे थे सबके साथ ना छोड़ने के , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , गूंजती धड़कने , सिसकती साँसें , देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , जिसे चाहो , वही दूर हो जाता , और ऐसे मेरा आत्मविश्वास भी मुझसे कह जाता कि , “देखो आज आँसू ही हाल पूछते है… Read more
