poetry
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आँखों के तिनके इतने मशगूल थे कि नज़रें चार मुसलसल अश्क के नमकीन एहसास , इन्तेज़ार मुकम्मल कर गया । @surbhisays Read more
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मुंतज़िर निगाहें , लेकिन दिलों में अफवाहें , कि मेरी दास्तान ए मोहब्बत , तेरे बेफिज़ुल मुड़ के देखने का अंजाम है। @surbhisays Read more
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तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में , किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने ! बिखरते , टूटते , चारों ओर , आ गए नजरों की ओर , चुभा ऐसा , कोना-कोना अंधकार जागा , आधा-पौना अंधी आँखें , टूटा दिल , हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल ! आत्मविश्वास दाव पर… Read more
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खोखला कर रहा ये अकेलापन, घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन ! सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ? मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ? अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था , आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था , साथ की… Read more
