आँखों के तिनके इतने मशगूल थे कि
नज़रें चार
मुसलसल अश्क के नमकीन एहसास ,
इन्तेज़ार मुकम्मल कर गया । @surbhisays
आँखों के तिनके इतने मशगूल थे कि
नज़रें चार
मुसलसल अश्क के नमकीन एहसास ,
इन्तेज़ार मुकम्मल कर गया । @surbhisays
मुंतज़िर निगाहें , लेकिन
दिलों में अफवाहें , कि
मेरी दास्तान ए मोहब्बत ,
तेरे बेफिज़ुल मुड़ के देखने का अंजाम है। @surbhisays
तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में ,
किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने !
बिखरते , टूटते , चारों ओर ,
आ गए नजरों की ओर ,
चुभा ऐसा , कोना-कोना
अंधकार जागा , आधा-पौना
अंधी आँखें , टूटा दिल ,
हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल !
आत्मविश्वास दाव पर लगा है ,
किस्मत का ऐलान , ” यही तेरी सज़ा है ! “
अरे! गलती बिना सज़ा कैसे ?
सपने देखा… सब के जैसे !
बोली किस्मत,
“आयेगा वही पास जो सच्चा चाहता तेरा साथ,
समुंदर की नमकीन उम्मीदें , ना देती गिरते हलक को हाथ । ” @surbhisays
खोखला कर रहा ये अकेलापन,
घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन !
सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ?
मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ?
अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था ,
आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था ,
साथ की जरूरत , पुकारती है ,
जिंदगी के कांटे , मारती है ,
क्यूँ ? क्यूँ ? प्रश्नों का सैलाब … रुकता नहीं ,
मुझे पा के किसी को उत्सुकता नहीं । @surbhisays