
छुपा है दर्द आँखों में ,
लटकी हुई है भावनायें हर शाखों पे ।
घुटन का एहसास हर दिन मारता है ,
क्या करे ! हर बार हर दिल अपनाने से नकारता है !
ठोकर खा फिर भी ये आँखें मुस्कराती है ,
लेकिन आँसुओं का बोझ , चक्रवाती है !
झाँक रही है भावनाएं इस उम्मीद में ,
कि इस दर्द को अपना , कोई तो खुशियों का झरोखा खोलदे ,
आज़ादी की खुशबू मेहका , इस दिल को अनोखा बोल दे । @surbhisays