छुपा है दर्द आँखों में ,

लटकी हुई है भावनायें हर शाखों पे ।

घुटन का एहसास हर दिन मारता है ,

क्या करे ! हर बार हर दिल अपनाने से नकारता है !

ठोकर खा फिर भी ये आँखें मुस्कराती है ,

लेकिन आँसुओं का बोझ , चक्रवाती है !

झाँक रही है भावनाएं इस उम्मीद में ,

कि इस दर्द को अपना , कोई तो खुशियों का झरोखा खोलदे ,

आज़ादी की खुशबू मेहका , इस दिल को अनोखा बोल दे । @surbhisays

बरकरार उम्मीदें , निष्ठावान है ,

बेकरार मुरादें , ऊर्जावान है ,

हठीली , जिद्दी , भिन्न – भिन्न प्रश्न ,

अड़ियल , सिद्धि , उत्तर से पूर्व जश्न ,

कि

खाली हाथ ना लौटेंगे ,

निश्चय साथ परचम लूटेंगे !

ना , काश सुनाई नहीं देता ,

हाँ , प्रकाश , शहनाई दिखाई देता !

मैंने पूछा उम्मीद से , ” संदेह की सुगंध आती है!”

हँस कर बोला ,

“मुश्किल से जागा है हारा हुआ विश्वास ,

सर झुका के रहेगा ये संदेह , जिधर हो सकारात्मकता का वास।” @surbhisays

रुख़सत कर दिया लगाव की रियासत को ,

दहशत का उफान , अलगाव कर दिया इसकी सियासत को !

सुकून की खुशबू धुंध सी ,

जैसे मौसम बदल , चल देती हवा सर्द सी !

आज़ादी की कोशिश , पहचान बनाने की ,

लग गई भावना , मचान बनाने में , “लगाव मुक्ति ” की !

डर था कि

लांग ना जाए दिल ये , मचान ऊँची नहीं ,

जकड़ ना ले दिल को , लगाव की लहर , सूची नहीं !

बारिश तेज और बाढ़ की संभावना ,

टूटती दीवार , लगाव को प्रस्तावना !

कि बहाना है दिल को , तो बहा लो ,

लेकिन बहते – बहते इसे तैरना सीखा दो । @surbhisays

क्या फायदा उम्मीद रखने से ,

जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से !

आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से ,

तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से !

हर कोशिशें छोटी – छोटी ,

उम्मीदें मोटी – मोटी ,

कि शायद रिझा सके ,

सारी शर्तें सुलझा सके ,

लेकिन नजरबंदी है

मेरी कोशिशों से ,

एहसानमंदी है

निरंतर सिफारिशों से !

मना लिया अपने को कि ,

“दिल टूटा है , समय जोड़ देगा ,

ज़ज्बात लूटा है , आत्मविश्वास की होड़ , उसे पिरोह देगा ।”

कोशिशों से भागना बुजदिली है ,

यह दुनिया है , इधर हर भावनायें दलदली है ,

इसमें जबतक गिरेंगे नहीं तो निकलना कैसे सीखेंगे ,

एक बार हिम्मत करके निकल गए , तो अगली बार परखना कैसे समझेंगे । @surbhisays

दिल के घर में जगह बनाना कितना मुश्किल है ,

थोड़ा ठोस , थोड़ा स्थिर , लेकिन इरादा मुस्तक़िल है !

सामने हो के भी हिम्मत नहीं पड़ती बोलने की ,

शायद दिल समय लेता होगा इरादे , तोलने की !

थोड़ा कदम बढ़ाना होगा ,

रास्ता सुरंग है , खज़ाना ज़रूर होगा ,

पिघलना पड़ेगा इस उलझन भरी राह में ,

शायद यही प्यार का तीराह है !

परेशान ना हो ,

कठिनाई होना ज़रूरी है ,

प्यार पाना फितूरी है !

जीलो आज इस कष्ट में ,

कल होगा नाम तुम्हारा , प्यार के पृष्ठ में !

भविष्य सबका सुहाना है ,

बस अभी कुछ कष्ट को चुकाना है । @surbhisays

निरंतर प्रयास मे रहती भावनायें , बोलने के ,

लेकिन निगल के रह जाती घूँट डर के ,

डर इस बात का कि

कहीं वो बुरा ना मान जाए ,

बुरा मान कहीं ख्वाब अधूरे ना कर जाए ,

ख्वाब अधूरे कर कहीं डर की जीत पूरी ना कर जाए !

समेट कर भावनायें दिल में दफन करना ही एक राह है ,

निकल गई तो , कफ़न में ढ़की , काँधे में लदी , उसकी कराह है !

कितनी जिद्दी है ये भावनायें!

मुझे कहती , ” चल एक प्रयास करते है , हिम्मत करो मिल के अभ्यास करते है ! “

“मान लो वह ये सुन , हमारा प्रस्ताव कबूल करले , कबूल कर हमसे प्यार से बर्ताव करले ! “

मुझसे हँसी रोकी ना गई , मेरा साथ दे , भावनायें मज़बूत होती गई !

मैंने कहा , ” दल- दल हो तुम भावना ! फाँस लेने की है तुम्हारी योजना ! “

यह सुन मुझसे कहती , ” सच्चा है प्यार तुम्हारा तो थोड़ा उनको भी दो व्यक्त करने का मौका , क्यूँकी साथ जल्दी काट देती कष्ट का रास्ता , यह प्यार की नौका ! ” @surbhisays

अपने से नफ़रत का एहसास होना ,

हर पल घुटन की सास लेना ,

लोगों द्वारा शारीरिक सुंदरता के कदम छुना ,

और इस तरह आत्मविश्वास के पलकों का चूना ,

जीवन और मौत के रस्ते पर झूलने के बराबर है !

काश लोग एक बार दिल मे झाँक के देखते ,

की कैसे बसे है इसमें लोगों द्वारा दिए गए बेज्जती के राख के टुकड़े ,

प्रेम का स्पर्श चाहता है ,

अपनी सिर्फ अपनी ही सुंदरता के आदर्श पर रहता है ,

इन्तेज़ार है उसे की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,

की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,

चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,

बदलते ही सबने इसको नकारा है ,

दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,

सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays

बहुत दर्द देता है ये अकेलापन ,

आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन !

चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द ,

गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द !

डरता है दिल साँझा करने से ,

क्या करे इतने धोखे बाद , डर गया है मरने से !

इन्तेज़ार मेरा खाली चला गया ,

प्यार से उगाया फूल , तार- तार कर गया !

बोला रख लेना इसकी पंखुड़ियां , सूखी , बेजान – तू इसी लायक है ,

मैंने पूछा सूखी पंखुड़ियां भी खुशबू देती, क्या कोई उम्मीद या दायक है?

हँसता रहा मेरी उम्मीद देख के ,

कहता तू पागल, बचकानी , तरस आता तेरा इन्तेज़ार देख के !

टूटा मेरा दिल बस मुझसे यही पूछता ,

“क्या कोई है जो तेरा हाथ पकड़ के बोले , ले मसल देता हूँ तेरे दिल के हिचकोले !” @surbhisays

एहसास था वो धोखा ज़रूर देंगे ,

लेकिन कहीं दिल से निकली आवाज़ कहती , वो वफा ज़रूर उड़ेलेंगे ,

हम इन्तेज़ार करते रहे उनकी दस्तक का ,

लेकिन वो कहते हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे !

इन्तेज़ार मेरा खाली रह गया ,

ज़रूर मिलेंगे , ज़रूर मिलेंगे रह गया !

अकेले रहने की आदत को मन संभालेगा ,

संभालेगा, मजबूरी मान लेगा ,

मजबूरी मान लेगा , दिल संभालेगा

कि किसी को आदत ना बनाओ ,

अपने ज़ज्बात अपने दिल को सुनाओ ,

कोई किसी का होता नहीं ,

होता तो जज़्बातों को पैरों तले कुचलता नहीं ।@surbhisays