A heavy feel on breath..

A heavy feel on eyes..

A heavy feel on heart…

Body odours like a carcass..

Walking down the street..

Dehydrated!

A dead plant too needs water to gain life..

where’s the gardener? ( a help)

where’s the sunshine? ( a hope)

where’s the love? ( a motivation)

where’s life? ( water)

it was far far away!

FAITH. pursued!

and it rained !!

Back to life…

TRUST GOD , HE WILL NEVER UPSET YOU! @surbhisays

शोर है , तेज़ सा ,

दिल घबरा रहा है ,

दूर है सब , परहेज सा ,

रोज़ जता रहा है।

क्रोध है , पुकार सा ,

घायल कर रहा है ,

झाँकता ना तू एक बार ,

कायल कर , “कटाक्ष” रहा है ।

दर्द है , उफान सा ,

कैद कर रहा है ,

दहाड़ है , शेर सा ,

हैसियत जता रहा है । @surbhisays

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the brightest light ,

Struggling and fighting ,

Battling to survive…

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the highest climb

Curling and gruelling ,

Clashing to survive…

And in the whirlpool of sorrow ,

Lives the loudest screech

Unwinding and detaching ,

Conquering each. @surbhisays

बारिश की बौछार से
भीगा हुआ मेरा दिल ,
धूप की गुनगुनाहट से ,
सेंकता हुआ मेरा दिल ,

तेज़ हवाओं की थपेड़ों से
चीरता हुआ मेरा दिल ,
झुंझलाहट की मार से
थका हुआ मेरा दिल ,

तेरे साथ होने के एहसास से ,
सब सह लेना चाहता मेरा दिल ,
तेरी मोहब्बत से बुने घरौंदा से ,
ठहराव समेटेना चाहता मेरा दिल ।
@surbhisays

And the plateaus of sigh ,

are growing high ,

With the meadows of happiness ,

thriving lifeless !

The dooming present ,

and persistant accentuating repent ,

strangulating the emotions !

The feels on edge ,

with no one to even pledge ,

Here’s the broke soul ,

summoning GOD to patch this hole ! @surbhisays

एक तरफ तू है ,

एक तरफ मै हूँ ,

एक ही दीवार के नीचे ,

सामने पड़ा गुलदस्ता

बेज़ारी का ,

सँवार रहा गुलदान ,

दिया है तूने हर बार ।

सींच रहे जबरन ,

अखिर दिया तो तूने ही है

तुम्हारी आदत

और मैं सिर्फ कहावत

खिले तन्हाई के गुल

जिधर भंवरे की गुनगुनाहट

देख तेरी मुस्कराहट ,

और मेरे दिल की घबराहट ,

कि क्यूँ ?

एक तरफ़ा रिश्ता प्रश्न चिन्ह लगा जाता ,

कि बिना आग उम्मीद इसे सुलगा जाता । @surbhisays



हर साल  हर नर्म दास्तान ,

लिपटा है यादों में हर वो इंसान ,

जो छोड़ चला जाता , जज्बातों का चीड़ फाड़ ।

उम्मीदों के बावले इन्तेज़ार की औकात बता जाता ,
की क़र्ज़ हो तुम , मजबूरी चुकाता ।

देखो वो पड़े है मेरे नोचे हुए उम्मीदों के पंख ,
सियाही में डूबा हुआ ,
लिख रहे है दिल का छुआ…

इस उम्मीद में कि

पंख में फँसे बोझ कम हो जाएंगे
हिम्मत के धागे इसे वापस सिल पाएंगे। @surbhisays

वादे थे सबके साथ ना छोड़ने के ,

देखो आज आँसू ही हाल पूछते है ,

गूंजती धड़कने , सिसकती साँसें ,

देखो आज आँसू ही हाल पूछते है ,

जिसे चाहो , वही दूर हो जाता , और ऐसे मेरा आत्मविश्वास भी मुझसे कह जाता कि ,

“देखो आज आँसू ही हाल पूछते है , “

सवाल है दिल में

कि क्या खुशियाँ भी रहती नसीब के बिल में !

नम रहता सिरहाना मेरा ,

अंधेरे की बात है ,अंधेरे तक रहने देना ,

टूट चुके है हर ज़ज्बात मेरे ,

लेकिन हर बार

इन कांपते हाथों को थाम लेते

बुढ़ी माँ के प्यार के बसेरे । @surbhisays

आँखों के तिनके इतने मशगूल थे कि

नज़रें चार

मुसलसल अश्क के नमकीन एहसास ,

इन्तेज़ार मुकम्मल कर गया । @surbhisays

तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में ,

किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने !

बिखरते , टूटते , चारों ओर ,

आ गए नजरों की ओर ,

चुभा ऐसा , कोना-कोना

अंधकार जागा , आधा-पौना

अंधी आँखें , टूटा दिल ,

हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल !

आत्मविश्वास दाव पर लगा है ,

किस्मत का ऐलान , ” यही तेरी सज़ा है ! “

अरे! गलती बिना सज़ा कैसे ?

सपने देखा… सब के जैसे !

बोली किस्मत,

“आयेगा वही पास जो सच्चा चाहता तेरा साथ,

समुंदर की नमकीन उम्मीदें , ना देती गिरते हलक को हाथ । ” @surbhisays