एहसास था वो धोखा ज़रूर देंगे ,
लेकिन कहीं दिल से निकली आवाज़ कहती , वो वफा ज़रूर उड़ेलेंगे ,
हम इन्तेज़ार करते रहे उनकी दस्तक का ,
लेकिन वो कहते हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे !
इन्तेज़ार मेरा खाली रह गया ,
ज़रूर मिलेंगे , ज़रूर मिलेंगे रह गया !
अकेले रहने की आदत को मन संभालेगा ,
संभालेगा, मजबूरी मान लेगा ,
मजबूरी मान लेगा , दिल संभालेगा
कि किसी को आदत ना बनाओ ,
अपने ज़ज्बात अपने दिल को सुनाओ ,
कोई किसी का होता नहीं ,
होता तो जज़्बातों को पैरों तले कुचलता नहीं ।@surbhisays