क्या फायदा उम्मीद रखने से ,
जिधर सिर्फ शर्तें है , बनावटी से !
आँखें पस्त पड़ गई है , आँसुओं के बहाव से ,
तरस भी नहीं आता देख , इसके गिरते भाव से !
हर कोशिशें छोटी – छोटी ,
उम्मीदें मोटी – मोटी ,
कि शायद रिझा सके ,
सारी शर्तें सुलझा सके ,
लेकिन नजरबंदी है
मेरी कोशिशों से ,
एहसानमंदी है
निरंतर सिफारिशों से !
मना लिया अपने को कि ,
“दिल टूटा है , समय जोड़ देगा ,
ज़ज्बात लूटा है , आत्मविश्वास की होड़ , उसे पिरोह देगा ।”
कोशिशों से भागना बुजदिली है ,
यह दुनिया है , इधर हर भावनायें दलदली है ,
इसमें जबतक गिरेंगे नहीं तो निकलना कैसे सीखेंगे ,
एक बार हिम्मत करके निकल गए , तो अगली बार परखना कैसे समझेंगे । @surbhisays