टूटा था वो काँच आदतों का ,
तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना,
जिधर चुभा ना था , चाहतों का बोना ,
आँसुओं से लत पत , दौड़ता दर्द ,
घबराहट , उलझन , दुखों का ज़र्द ।
टूटा था वो काँच आदतों का
तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना ,
जो समझा ना था , धोखे का होना ,
साँसों का उखाड़ना , गहरा ज़ख़्म ,
गिरती , टूटती भावनाओं , कोशिशें खत्म।
टूटा था वो काँच आदतों का ,
तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना,
जो स्वीकार लिया था वर्तमान , आखिरी बार रोना ,
गिर गया था समय के पांव में ,
मना लिया था रहना टिक -टिक की छांव में ।
टूटा था वो काँच आदतों का ,
तब छुपा ना था कोई ऐसा कोना । @surbhisays