हर कोई किसी के करीब है ,
लेकिन फिर भी दिल गुमसुम , गरीब है !
ना जाने क्यों इज़हार करने से डरते है ,
या बेफजूल एक तरफा ज़ज्बात पकड़ते है !
आँखें नम और जुबान मौन है ,
क्यूँ ये ज़ज्बात- ए- लफ्ज़ पौन है !
शिकार है दिल प्यार नामक शिकारी का ,
मारेगा , जलाएगा , लौह है वो उस चिंगारी का !
डरों नहीं प्यार है कोई औजार नहीं ,
थोड़ा जिद्दी है , बेज़ार नहीं !
अनोखा है , थोड़ा रुलाएगा ज़रूर ,
लेकिन ये प्यार है जनाब , मनाएगा ज़रूर । @surbhisays