बहुत दर्द देता है ये अकेलापन ,
आँसुओं की लहर , गूँजता है ये खोखलापन !
चीख- चीख के आँखें कहती , कोई तो सुन लो मेरा दर्द ,
गुमसुम है , कपकपी है , बचालो इस , दिल का फ़र्द !
डरता है दिल साँझा करने से ,
क्या करे इतने धोखे बाद , डर गया है मरने से !
इन्तेज़ार मेरा खाली चला गया ,
प्यार से उगाया फूल , तार- तार कर गया !
बोला रख लेना इसकी पंखुड़ियां , सूखी , बेजान – तू इसी लायक है ,
मैंने पूछा सूखी पंखुड़ियां भी खुशबू देती, क्या कोई उम्मीद या दायक है?
हँसता रहा मेरी उम्मीद देख के ,
कहता तू पागल, बचकानी , तरस आता तेरा इन्तेज़ार देख के !
टूटा मेरा दिल बस मुझसे यही पूछता ,
“क्या कोई है जो तेरा हाथ पकड़ के बोले , ले मसल देता हूँ तेरे दिल के हिचकोले !” @surbhisays